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जानिए श्रावण में क्यों आती है नागपंचमी, और क्यों चढ़ाते हैं नाग देवता को दूध?

Updated: सोमवार, 13 अगस्त 2018 (14:29 IST)
नाग पंचमी का पवित्र त्योहार 15 अगस्त 2018 को मनाया जाएगा। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मध्य काल में नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। जहां सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को उत्तर भारत में नाग पूजा की जाती है, वहीं दक्षिण भारत में ऐसा ही पर्व कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का अत्यंत महत्व माना जाता है। इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है और दूध चढ़ाया जाता है। भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय है, इसलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है। 
 
पूजा का शुभ मुहूर्त 
इस वर्ष नाग पंचमी का त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार नाग पंचमी हस्त नक्षत्र और साध्य योग में पड़ रही है, यह अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से सांयकाल 04 बज कर 13 मिनट तक है। इस दिन जो लोग नाग पूजा और काल सर्प योग की साधना आदि करते हैं वे अपनी पूजा प्रात 11 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 32 मिनट के मध्य कर लें। ये सर्प पूजा का सबसे शुभ काल है। 
 
कैसे करें पूजन 
नाग पंचमी के दिन सर्प को देवता मानकर पूजा करते हैं। इस दिन पूजा की विशेष विधि होती है। गरुड़ पुराण के के अनुसार नाग पंचमी की सुबह स्नान आदि करके शुद्ध होने के पश्चात भक्त अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर नाग का चित्र बनाएं या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद फल, सुगंधित पुष्पों नाग देवता पर दुग्ध चढ़ाते हुए पूजा करें। नागपंचमी पर रुद्राभिषेक का भी अत्यंत महत्व है। 
 
पुराणों के अनुसार पृथ्वी का भार शेषनाग ने अपने सर पर उठाया हुआ है इसलिए उनकी पूजा अवश्य की जानी चाहिए। ये दिन गरुड़ पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। नाग देवता के साथ इस दिन गरुड़ की भी पूजा की जाती है।
 
एक शाप के कारण नागलोक जलने लगा था। तब नागों पर दूध चढ़ाकर उनकी जलन को शांत किया गया था। उस दिन पंचमी तिथि थी। तभी से पंचमी तिथि पर नागों को गाय के दूध से नहलाने की प्रथा चली आ रही है। ऐसा करने से सर्प-भय नहीं रहता।
 
इस तिथि को जो भी व्यक्ति नागों को दूध से स्नान कराता है, उसके कुल को सांपों से भय नहीं रहता और वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्र, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कर्कोटक तथा धनंजय जैसे नाग उनकी रक्षा करते हैं।
 
इन कारणों से काटते हैं सांप
सांप के काटने के 8 कारण भी भविष्य पुराण में बताए गए हैं। इनमें आत्म रक्षा के लिए, दवाब से, पुराने बैर के कारण, डर से, भूख से, विष का वेग होने से, बच्चों की रक्षा के लिए और साथ ही काल की प्रेरणा से।

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