तबलीगी जमात: यह अपने और मानवता के प्रति अपराध है

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दिल्ली स्थित निजामुद्दीन के तबलीगी जमात में हुए आयोजन ने यह भय पैदा किया है कि देश ने अब तक अपने अनुशासन और संयम से कोरोना के प्रकोप को जिस तरह महामारी में परिणत होने से रोक रखा है उस पर कहीं पानी न फिर जाए।

जमात सम्मेलन के भागीदार देश में कोरोना संक्रमण के बड़े प्रसारक साबित हो रहे हैं। जमात में अनेक राज्यों के साथ विदेशी भी शामिल हुए थे।

मरकज से 2,361 लोग निकाले गए, जिनमें 766 को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक 300 पॉजिटिव केस में से 500 से ज्यादा निजामुद्दीन मरकज से जुड़े हैं। देश भर में तबलीगी जमात के जो 9000 लोगों की पहचान की गई है, उनमें से 1300 लोग विदेशी हैं। इन्हें कोरंटाइन में रखा गया है। राजधानी में कुल 350 संक्रमितों में से 290 निजामुद्दीन मरकज से ही है। देश भर में जमीत से जुड़े 19 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में आगामी दिनों में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि सरकार ने मरकज से निकाले गए सभी लोगों की जांच कराने का निर्णय किया है। यह स्थिति केवल दिल्ली की नहीं है। जिन 22 राज्यों से आए लोगों का पता चला है वो सब इस खतरे के दायरे में आ गए हैं। दक्षिण में केरल, तमिलनाडु, तेलांगना, कर्नाटक से लेकर उत्तर में कश्मीर तथा पश्चिम में महाराष्ट्र तक इसकी भयावह आंच लग चुका हैं। कई राज्यों का मस्जिदों से विदेशी निकाले गएं हैं जो जमात सम्मेलन में शामिल थे। यहां से लौटने वालों ने रेलों, बसों, जहाजों से यात्राएं की हैं। इनमें से कितने संक्रमित थे और इन्होंने कितनों को संक्रमित किया इसकी कल्पना से ही सिहरन पैदा हो जाती है। ये सब कोरोना टाइम बम बन चुके हैं।

जो लोग इस समय जमात को बचाने में लगे हैं उनको यह जानना चाहिए कि इन लोगों ने एक समय निजामुद्दीन मरकज गए एम्बुलेंस तक को लौटा दिया गया। काफी विरोध किया। स्वास्थ्यकर्मियों के पास वापस आने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। वास्तव में राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन के उस पूरे इलाके के ही कोरोन क्षेत्र बन जाने का खतरा पैदा हो गया है। इलाके में सैनिटाइजेशन के लिए स्पेशल ड्राइव चला है। किंतु तंग गलियों को पूरी तरह सैनिटाइज करना आसान नहीं होता। फिर दिल्ली में तो आप कुछ कर लेंगे, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों का क्या होगा? अंडमान निकोबार प्रशासन का कहना है कि उसने 24 मार्च को दिल्ली सरकार को इसकी लिखित सूचना दी थी कि तबलीगी जमात के सम्मेलन से लौटे नौ लोग तथा उनमें एक की पत्नी कोरोना पोजिटिव है। इसमें यदि दिल्ली सरकार कहती है कि उसे पता नहीं था तो इससे बड़ा आत्मघाती झूठ कुछ नहीं हो सकता।

निस्संदेह, दिल्ली पुलिस की जिम्मेवारी थी कि इतने बड़े जमावड़े को रोके। पुलिस के दोष पर हम चर्चा कर सकते हैं, लेकिन यहां मूल प्रश्न दूसरा है। तबलीगी का मतलब अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला होता है। जमात का मतलब होता है, एक खास धार्मिक समूह। यानी धार्मिक लोगों की टोली, जो इस्लाम के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए निकलते हैं। मरकज का मतलब होता है बैठक या फिर इनके मिलने का केंद्र। जमात का दावा है कि उसका संगठन दुनिया के 213 मुल्कों में फैला है और इससे दुनियाभर के 15 करोड़ लोग जुड़े हैं। हालांकि 213 मुल्क को दुनिया के नक्शे में भी नहीं हैं।

तो इसके मुल्क मानने का भी तरीका अलग है। लेकिन मजहब का प्रचार करने वाला संगठन मजहब के नाम पर गैर जिम्मेवार या दूसरे शब्दों में कहें तो आपराधिक कृत्य कैसे कर सकता है? यह ऐसा प्रश्न है जिस पर साहस के साथ सच बोलने की आवश्यकता है। भारत में तब्लीगी जमात का केंद्र निजामुद्दीन मरकज ही है। ऐसा नहीं है कि वहां उपस्थित लोगों को पता नहीं था कि हर तरह के सम्मेलन की सीमा तय कर दी गई है और इसका उल्लंघन खतरे से खाली नहीं है। मरकज के प्रमुख मौलाना साद ने कोरोना संकट के बीच कई तकरीरो दीं जोअब यूट्यूब से हटा लिया गया है।

उसमें वे कोरोना के नाम पर बंदिशों तथा बाद में लॉक डाउन मुसलमानों के खिलाफ बताकर कह रहे हैं कि इसे मानने की आवश्यकता नहीं है। वे इसे मुसलमानों को मुसलमानों से दूर करने का साजिश बता रहे हैं। तो जानते हुए जमात के नेतृत्व ने इसका आयोजन किया, वहां समूह में रहने के लिए तैयार किया। ध्यान रखिए, इस कार्यक्रम में शामिल हुए अनेक लोग 27 फरवरी से 1 मार्च के बीच कुआलालंपुर में हुए इस्लामिक उपदेशकों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद भारत आए थे।

यहां यह बताना जरुरी है कि जमात को लेकर जिस तरह भारत में हड़कंप मचा है वह स्थिति कई देशों की है। उदाहरण के लिए 12 मार्च से पाकिस्तान के लाहौर में इसका पांच दिवसीय सम्मेलन हुआ था। कोरोना संकट को देखते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों ने जमात के धर्मगुरुओं से इसे रद्द करने की अपील की लेकिन जमात ने एक न सुनी। पाकिस्तान के पंजाब में तबलीगी जमात के 27 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कोरोना के बहुत तेजी से बढ़ते मामलों के पीछे भी यही इज्तिमा जिम्मेदार है। पंजाब में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

सिंध के हैदराबाद में तबलीगी के 94 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई। स्थानीय प्रशासन ने तबलीगी के कई प्रचारकों को हिरासत में लेकर क्वारंटीन किया है। द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब क्वारंटीन सेंटर में सबका टेस्ट किया जा रहा था तो उनमें से एक प्रचारक ने पुलिस पर चाकू से हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। पंजाब के रायविंड शहर को ही सील कर दिया गया जहां जमात मुख्यालय है। जमात की इस बैठक में हिस्सा लेने के दो लोग फलस्तीन से आए थे। ये दोनों संक्रमित हो गए। ये वापस फलस्तीन पहुंचे तो वहां भी कोरोना पहुंच गया। आयोजन में हिस्सा लेने वाले किर्गिस्तान के दो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए।

मलेशिया में भी इसी तरह तबलीगी जमात का एक सम्मेलन हुआ था। आयोजन में हिस्सा लेने वाले 620 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोग दक्षिण पूर्व एशिया के 15 देशों के नागरिक हैं और इनमें तबलीगी जमात की भूमिका है।

इसके बाद समझने की आवश्यकता नहीं है कि इनको रोकना कितना कठिन होता होगा। हालांकि पुलिस प्रशासन को सख्ती से पेश आना चाहिए था। लेकिन आप एक और पहलू देखिए। अभी तक जो जगह कोरोना के हॉटस्पॉट के रुप में पहचाने गए हैं उनें दिल्ली का दिलशाद गार्डन और निजामुद्दीन, केरल का कासरगोड़ और पथनामथिट्टा, उत्तर प्रदेश का नोएडा और मेरठ, महाराष्ट्र का मुंबई, पुणे और सांगली, राजस्थान का भिलवाड़ा और गुजरात का अहमदाबाद और सूरत शामिल है।

इनमें से ज्यादातर लोग मक्का या सउदी अरब, ईरान आदि से आए और कोरांटाइन का पालन करने की जगह परिवार में घुलमिल गए। इनने स्वयं को,परिवार को और दूसरे को भी संक्रमित किया। हमने कोनिका कपूर की खूब निंदा की और सही थी। दिल्ली में हुई पहली मौत के लिए मृतका के बेटा को जिम्मेवार ठहराया जो स्विट्जरलैंड एवं इटली से होकर आया था। स्वयं भी संक्रमित हुआ और मां को ग्रास बना दिया। लेकिन दूसरे पक्ष की आलोचना करने या उनको सतर्क करने से हमारे यहां बचने की बीमारी है, क्योंकि इससे एक वर्ग हमें मुस्लिम विरोधी तथा सांप्रदायिक कहेगा। महाराष्ट्र के सांगली जिला का इस्लामपुर कोरोना का केन्द्र बन रहा है। वहां मक्का से आए लोग परिवार में मिल गए।

एक परिवार के 24 लोग संक्रमित हैं। दिल्ली के दिलशाद गार्डन की महिला मक्का से लौटी। उसने भी यही किया। परेशानी होने पर मोहल्ला क्लिनिक में दिखाने आ गई। डॉक्टर, उनकी पत्नी और बेटी संक्रमित, महिला का परिवार भी संक्रमित और सैंकड़ों लोगों को कोरांटाइन करने की नौबत आ गई। पीलीभीत में 35 लोग मक्का से लौटे। उन्होंने कोरांटाइन की मुहर मिटा दी। उनमें से जब एक मां और उनका बेटा संक्रमित पाया गया तब सबकी खोज करनी पड़ रही है। केरल से कश्मीर तक यही कहानी है। एक समुदाय के ज्यादा लोग संक्रमित हैं या फिर उनके संपर्क में आने वाले।

इसकी चर्चा सांप्रदायिकता नहीं बल्कि सचेत करने के लिए है कि ऐसे लोग जहां हैं वे स्वयं अपने जिलों, शहरों के हेल्पलाइन पर फोन करके सच बताएं तथा जो निर्देश दिया जाए उसका पालन करें। इसी में सबकी जान बचेगी। तबलीगी जमात को लोगों तथा अन्यों की जान बचाने जा रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर जिस तरह हमले हो रहे हैं, उनसे पता चलता है कि लोगों के दिमाग में कितना जहर भरा जा चुका है। तो कोरोना से संघर्ष का साथ यह संघर्ष का एक अलग मोर्चा खुल गया है।




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