सुषमा स्वराज : स्मृति शेष

स्मृति आदित्य|
वाणी में ओज, चेहरे पर तेज, सौम्य उजास, ममता बरसाती आंखें, सजीली मीठी मुस्कान... सुषमा स्वराज... कैसे लिखूं कि नहीं रहीं ..एक ऐसी दिव्य, भव्य और उजाले से भरी नेता जिन्हें सुनकर लगता था कि बस वे बोलती रहें और हम सुनते रहें। उन्हें देखकर राजनीति से प्यार हो जाए, राजनीति में रहकर गरिमा, मर्यादा, प्रखरता और सौम्यता कैसे बरकरार रखी जाए ये उनसे सीखने योग्य है।
आत्मविश्वास ऐसा कि विपक्ष भी चमत्कृत रह जाए,वाणी से झरता ज्ञान ऐसा कि बरबस ही मुँह से वाह निकल जाए। भाषण की तैयारी ऐसी कि हर किसी को निरुत्तर कर दें। कभी मिल नहीं पाई उनसे इस बात का गहरा अफसोस है लेकिन उनकी दिव्य वाणी इन कानों में पड़ी ये बहुत बड़ा सौभाग्य मानती हूं।
विदेशों में फंसे किसी नागरिक के एक ट्वीट पर तुरंत कार्यवाही करने का जज़्बा सिर्फ उन्हीं के बस का था। आपको खोना इतना अविश्वसनीय है कि आंख रह रह कर भर आती है हर वाक्य के साथ, इतना लाड़, दुलार,प्यार कितने नेताओं को नसीब हो पाता है। बहुत बहुत टूटे दिल के साथ यही कहूंगी की जहां रहो सुकून से रहना।

यह देश बहुत बहुत मिस करेगा अपनी प्रिय और प्रखर नेता को। काल का वह कैसा क्रूर लम्हा था जिसने आपसे अपने अंतिम ट्वीट में लिखवाया की जीवन में इस दिन की प्रतीक्षा कर रही थी।खुद ही अपने लिए थीं लिख कर हमेशा के लिए मन में बस गई हो आप...अश्रुपूरित श्रद्धांजलि...

 

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