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Written By अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

मोक्ष का शॉर्ट कट!

योग का लक्ष्य है मोक्ष

मोक्ष
नैनो टेक्नलॉजी के जमाने में लोग हर वस्तु का शॉर्ट कट ढूँढ़ने लगे हैं। जो लोग कम्प्यूटर पर कार्य करते हैं वे जानते हैं कि शॉर्ट कट का महत्व कितना है। ‍कुछ मामलों में तो शॉर्ट कट का बहुत महत्व है। दुनिया 'शॉर्ट कट' की हो चली है। तो क्या मोक्ष तक पहुँचने का भी कोई शॉर्ट कट है?

यह सवाल भले ही हैरत में डालने वाला हो मगर इसका जवाब बेहत छोटा है- हाँ, मोक्ष का भी शॉर्ट कट है।...और यह हम बताएँगे आपको।

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उन लोगों को भूल जाएँ जो यह कहते हैं कि कठिन तपस्या या प्रभु की इच्छा से ही संसार सागर से पार हुआ जा सकता हैं। हम जानते हैं कि ऐसे लोगों का मोक्ष जैसे विषयों में कोई इंटरेस्ट नहीं है। 'मोक्ष' नाम सुनकर ही उन्हें लगता हैं कि कोई परंपरागत बात हो रही है, लेकिन उन लोगों को यह नहीं मालूम की नासा के कुछ वैज्ञानिकों ने जब अंतरिक्ष में अपना मॉस्क निकालकर साँस लेने का प्रयास किया तो पहली दफे समझ में आया की शायद भारत में समाधि की अनुभूति कुछ इसी तरह की कही गई है।

यदि पश्चिमी लोग आकर कहें कि 5000 डॉलर में 'शरीर से बाहर रहने की अनुभूति' के उपाय जानें, तो शायद अपना स्टेटस मेंटेन करने के लिए सबसे पहले भारत के नवधनाढ्‍य लोग झूम पड़ेंगे, जिनमें बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ सबसे आगे होंगी। जैसे उन्हें 'हठ योग' कहने में थोड़ा ऑड लगता है इसीलिए उसे अब वे 'पॉवर योगा' कहती हैं। खैर।

क्या होता है मोक्ष : मोक्ष की धारणा वैदिक ऋषियों से आई है। इस मोक्ष को ही जैन धर्म में कैवल्य ज्ञान और बौद्ध धर्म में निर्वाण कहा गया है। योग में इसे समाधि कहा गया है। इसके कई स्तर होते हैं। मोक्ष एक ऐसी दशा है जिसे मनोदशा नहीं कह सकते। इस दशा में न मृत्यु का भय होता है न संसार की कोई चिंता। सिर्फ परम आनंद। परम होश। परम शक्तिशाली होने का अनुभव। अतीत, वर्तमान और भविष्य खुला हुआ। मोक्ष प्राप्त व्यक्ति के समक्ष ब्रह्मांड तुच्छ चीज है। जन्म और मरण के चक्र में तुच्छ लोग ही उलझते हैं। जरा से शरीर में रहकर पाँच इंद्रियों के क्षणिक भोग को भोगने का कोई मजा नहीं। महाभोग होना चाहिए।

मोक्ष प्राप्ति की योग्यता : आप मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी जीते-जी तो पहले शारीरिक और मानसिक रूप से आपका पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है। दूसरी बात मोक्ष प्राप्त करने की अत्यधिक इच्छा होना बहुत जरूरी है, जिसे मुमुक्षा कहा गया है। तीसरी बात आप साधन-सम्पन्न हों क्योंकि भूखे भजन न होय गोपाला। साधन सम्पन्न रहेंगे तो अपने लिए बेहतर महौल भी निर्मित कर ही लेंगे। ऐसा माहौल जहाँ शांति हो तथा जो प्रदूषणमुक्त हो। हरा-भरा हो।

प्रतिबंध : भय, क्रोध, चिंता, सुख-दुख, आलस्य, अधिक शयन, अत्यधिक जागरण, अधिक भोजन या फिर बिलकुल निराहार रहना, बहस करना, दिमागी द्वंद में रहना, जागते हुए कल्पना करना। ज्यादा सोचना या बोलना, मान-अपमान समझना, आदि समस्त दुर्गुणों को सदैव के लिए परित्याग कर दें। प्रदूषण और बुरी संगत से बचें। बचें व्यर्थ में फिल्म और टीवी देखने से भी। मन को भटकाने वाले सारे तत्वों को समझकर उन पर धीरे-धीरे प्रतिबंध लगा दें। ऐसा संभव है सिर्फ उक्त बुराइयों पर निरंतर ध्यान देने से।

मोक्ष आकांक्षा : एक सुहानी सुबह किसी व्यक्ति ने बुद्ध से पूछा कि क्या सभी को मोक्ष मिल सकता है? और यदि मिल सकता है, तो फिर मिलता क्यों नहीं?

बुद्ध ने कहा कि जाओ और नगर में पूछकर आओ कि जीवन में कौन क्या चाहता है? वह व्यक्ति घर-घर गया और संध्या को थका-माँदा एक लिस्ट लेकर लौटा। कोई यश चाहता था, कोई पद चाहता था, कोई धन, वैभव, समृद्धि, पर मोक्ष का आकांक्षी तो कोई भी नहीं था!

बुद्ध बोले कि अब बोलो और पूछो, मोक्ष तो प्रत्येक को मिल सकता है। वह तो है ही, पर तुम एक बार उस ओर देखो भी तो! हम तो उस ओर पीठ किए खड़े हैं।

हम आपसे कहते है कि संसार के सारे सुखों के साथ मोक्ष को भी जोड़ लें और इसे प्राप्त करने के लिए इसे अपनी 'जिद' बना ले। हम जानते हैं कि कुछ लोगों को मोक्ष से कोई मतलब नहीं। जैसे बच्चा कोई प्रश्न पूछता है इसलिए नहीं कि उसके मन में उत्तर को सुनने की उत्कंठा है, बस पूछ लिया यूँ ही...कौतुहलवश। पढ़े अगला भाग।

मोक्ष का शॉर्ट कट-2
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें