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Written By WD

मोक्ष का शॉर्ट कट-2

अमृतनादोपनिषद के वचन

योग योगासन
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यहाँ प्रस्तुत है अमृतनादोपनिषद के कुछ सूत्र जिससे यह सिद्ध होता है कि मोक्ष प्राप्त करना कितना सरल और सहज है। बस जरूरत है तो दृढ़ संकल्प की।

भयं क्रोधमथालस्यमतिस्वप्नातिजागरम्।
अत्याहारमनाहरं नित्यं योगी विवर्जयेत्।।28।

भय, क्रोध, आलस्य, अधिक शयन, अत्यधिक जागरण करना, अधिक भोजन करना या फिर बिलकुल निराहार रहना आदि समस्त दुर्गुणों को योगी सदैव के लिए परित्याग कर दे।।28।।

अनेन विधिना सम्यड्‍ नित्यमभ्यस्यते क्रमात।
स्वयमुत्पद्यते ज्ञानं त्रिभिर्मासैन संशय: ।।29।

इस प्रकार नियमपूर्वक जो भी साधक क्रमश: उत्तरोत्तर प्रगति करता हुआ नियमित अभ्यास करता है, उसे तीन मास में ही स्वयमेव ज्ञान की प्राप्ति हो जाति है, इसमें कुछ भी संशय नहीं है।।29।।

चतुर्भि: पश्यते देवान्पंचभिर्वितत: क्रमात्।
इच्छयान्पोति कैवल्यं षष्ठे मासि न संशय:।।30।

वह योगी (साधक) नित्य-नियमित अभ्यास करता हुआ चार मास में ही देव दर्शन की सामर्थ्य प्राप्त कर लेता है। पाँच माह में देव-गणों के समान शक्ति-सामर्थ से युक्त हो जाता है तथा छह मास में अपनी इच्छानुसार निसंदेह कैवल्य (मोक्ष) को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है।

शायद आप सोच रहे होंगे कि यह छह माह का तप तो कठिन है। 70 साल की जिंदगी में यदि आप सिर्फ छह माह नहीं निकाल सकते तो हम बताएँगे आपको एक नया आधुनिक 'शॉर्ट कट' जो बदल देगा आपका जीवन। आगे पढ़ेंगे कि मोक्ष प्राप्त के और क्या हैं सरल उपाय।

मोक्ष का शॉर्ट कट!
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