महाराष्ट्र : सत्ता में बराबरी की हिस्सेदारी के लिए शिवसेना ने BJP से मांगा लिखित में आश्वासन

पुनः संशोधित रविवार, 27 अक्टूबर 2019 (00:01 IST)
मुंबई। शिवसेना ने अपने सहयोगी दल भाजपा से लिखित में मांगा कि वह में ‘सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी के फार्मूले’ (50:50) को लागू करेगी। वहीं विपक्षी कांग्रेस ने कहा है कि उद्धव ठाकरे नीत पार्टी को ‘वैकल्पिक व्यवस्था’ तलाशनी चाहिए। शिवसेना के नवनिर्वाचित विधायकों ने मुंबई में पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के आवास पर उनसे मुलाकात की। उन्होंने उनके (उद्धव के) बेटे एवं युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की।
राज्य में 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 56 सीटों पर जीत दर्ज करने के दो दिनों बाद नवनिर्वाचित विधायकों ने ठाकरे से मुलाकात की। उन्होंने शिवसेना प्रमुख को नई सरकार के गठन के बारे में फैसला लेने के लिए अधिकृत किया। शिवसेना के एक विधायक ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने भी कहा है कि ‘उनके पास अन्य विकल्प खुले हैं।’ लेकिन वे उन्हें तलाशने में रुचि नहीं ले रहे हैं क्योंकि भाजपा और शिवसेना हिंदुत्व की विचारधारा की डोर से एक दूसरे से बंधी हुई है।

इस बीच महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद शिवसेना द्वारा कथित तौर पर मांगे जाने के बारे में पूछे जाने पर बस इतना कहा कि हर किसी को अपना विचार प्रकट करने का अधिकार है। हालांकि पुणे शहर के कोठरूड सीट से निर्वाचित हुए पाटिल ने कहा कि सरकार गठन पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक सदन में पार्टी के विधायक दल का नेता चुनने के लिए मुंबई में 30 अक्टूबर को बैठक करेंगे।

शिवसेना के लिखित में आश्वासन मांगने को उसकी दबाव बनाने की तरकीब के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, भाजपा को 2014 की तुलना में इस चुनाव में 17 सीटों का नुकसान हुआ है और उसकी सीटों की संख्या 122 (वर्ष 2014) से घटकर 105 पर आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा के खराब प्रदर्शन ने शिवसेना की सौदेबाजी करने की ताकत बढ़ा दी है। हालांकि शिवसेना की सीटों की संख्या भी 2014 में 63 की तुलना में घटकर 56 पर आ गई हैं। शिवसेना विधायक प्रताप सरनाइक ने बैठक के बाद ठाकरे को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘लोकसभा और विधानसभा चुनाव में शिवसेना कम सीटों पर चुनाव लड़ी।

उद्धव ठाकरे ने कहा है कि भाजपा को सत्ता-साझेदारी के फार्मूले को लागू करने के बारे में लिखित में आश्वासन देना होगा। सीटों और सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी के बारे में मेरे आवास पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की मौजूदगी में इसे (फार्मूले को) तैयार किया गया था। अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन पर मुहर लगाने के वास्ते शिवसेना प्रमुख के आवास पर शाह ने ठाकरे से मुलाकात की थी। विधायक ने कहा कि भाजपा द्वारा इस तरह का आश्वासन दिये जाने पर अगली सरकार के गठन पर चर्चा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि नए विधायकों के शपथ ग्रहण करने के बाद शिवसेना के विधायक दल के नेता का चयन किया जाएगा, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने इस बात से इंकार किया कि उनकी पार्टी भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि यह हमारे सामने कोई विकल्प नहीं है। लोगों ने हमें विपक्ष में बैठने को कहा है। हमने उस जनादेश को स्वीकार किया है। पुणे जिले में बारामती स्थित पवार के आवास पर उनसे प्रदेश कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट के मुलाकात करने के बाद राकांपा प्रमुख का यह बयान आया है।

हालांकि निवर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि भाजपा को रोकने के लिये अन्य दलों को साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विपक्ष की भूमिका निभाने के लिये जनादेश मिला है। लेकिन भाजपा को रोकने के लिये हमें साथ आना होगा। शिवसेना को आगे आना होगा। शिवसेना को एक वैकल्पिक व्यवस्था के साथ आगे आना होगा क्योंकि जनादेश भाजपा के खिलाफ है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में एक ‘दिलचस्प संभावना’ (शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के साथ आने) के बारे में अटकलें उस वक्त शुरू हुई थीं, जब चुनाव नतीजे के दिन पूर्व मुख्यमंत्रियों एवं कांग्रेस नेताओं, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि पार्टी को भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए सभी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। राज्य में 21 अक्टूबर को 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनावों में भाजपा ने 105, शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं राकांपा 54 और कांग्रेस 44 सीटों पर विजयी रही। चुनाव परिणामों से भाजपा को झटका लगा है क्योंकि पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ अपने बूते सरकार बनाने का लक्ष्य रखा था।

लेकिन चुनाव नतीजों के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य ने शिवसेना का मनोबल बढ़ा दिया है जो बखूबी जानती है कि वह सौदेबाजी करने की स्थिति में है और मुख्यमंत्री पद के लिये आदित्य के नाम पर मुहर लगवा सकती है। आदित्य (29) 1960 के दशक में पार्टी के गठन के बाद से चुनावी राजनीति में उतरने और जीत हासिल करने वाले ठाकरे परिवार के प्रथम व्यक्ति हो गये हैं। वह मुंबई की वरली सीट से जीते हैं, जो शिवसेना का गढ़ है। गुरुवार को शिवसेना ने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए भाजपा को ‘50:50 फार्मूले’ की याद दिलाई थी, जिस पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, ठाकरे और फड़णवीस के बीच 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सहमति बनी थी।

सूत्रों के मुताबिक इस फार्मूले के मुताबिक शिवसेना और भाजपा के चक्रीय आधार पर मुख्यमंत्री होंगे और दोनों दलों को कैबिनेट में बराबर संख्या में जगह मिलेगी। ठाकरे ने कहा था कि मैं (शिवसेना) लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कम सीटों पर चुनाव लड़ा। मैं हर बार भाजपा के लिये गुंजाइश नहीं बना सकता। मैं भाजपा को उस फार्मूले की याद दिलाना चाहता हूं जो अमित शाह की मौजूदगी में बनाया गया था। वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट ने भी भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिये शिवसेना से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया।

हालांकि उन्होंने कहा, यदि शिवसेना कोई प्रस्ताव लेकर आती है तो (प्रदेश) कांग्रेस अपने आलाकमान से राय मांगेंगी। शिवसेना आदित्य का नाम राज्य के अगले मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर रही है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि फड़णवीस मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। शिवसेना सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को ट्विटर पर एक कार्टून पोस्ट कर भाजपा पर निशाना साधा था।



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