मध्यप्रदेश में बाघों की मौतों पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, इतनी बड़ी संख्या में बाघों का मरना सामान्य नहीं
मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में बाघों का मरना कोई सामान्य बात नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते तो इन मौतों को रोका जा सकता था। हाईकोर्ट ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को आदेश दिया है कि वे 25 फरवरी तक प्रत्येक मृत बाघ की मौत का कारण, चल रही जांच की स्थिति और विभाग द्वारा उठाए गए सुरक्षात्मक कदमों का विस्तृत ब्यौरा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक संख्या में बाघों की मौत हुई है।
गौरतबल है कि वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने प्रदेश में लगातार बाघों की मौत को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद से यह एक साल के भीतर मौतों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग अक्सर अवैध शिकार और बिजली के करंट जैसे गंभीर कारणों को छिपाने के लिए मौतों को आपसी संघर्ष का नाम दे देता है।
785 बाघों के साथ टाइगर स्टेट का दर्जा रखने वाले मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बाघों की मौतों उनकी सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अगर जांच में लापरवाही या अवैध शिकार की पुष्टि होती है, तो यह मामला सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि वन्यजीव संरक्षण की बड़ी विफलता साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में मध्य प्रदेश में देश में सबसे अधिक 55 बाघों की मौत हुई थी, जिसमें 10 बाघों की मौत करंट से हुई थी। प्रदेश में 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक संख्या है।
प्रदेश में बीते 10 सालों में 365 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है। इसमें 2025 में 55, वर्ष 2024 में 46, वर्ष 2023 में 45, वर्ष 2022 में 43, 2021 में अब तक 36, 2020 में 30, 2019 में 29, 2018 में 19, 2017 में 27 और 2016 में 34 बाघों की मौत हुई थी। दरअसल मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 बाघों के लिए काल साबित हुआ है, जिसमें रिकॉर्ड 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौतों में से एक बड़ा हिस्सा अस्वाभाविक कारणों से जुड़ा है।