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MP में कांग्रेस की राह पर भाजपा, गुटबाजी और पठ्ठावाद के चलते रद्द की गई भोपाल की जिला कार्यकारिणी

Madhya Pradesh News
मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा, जो अपने अनुशासन और कैडर आधारित राजनीति के लिए जानी पहचानी जाती है, अब धीरे-धीरे कांग्रेस की तर्ज पर गुटबाजी के गहरे दलदल में फंसती नजर आ रही है। भाजपा संगठन में लंबे समय से नियुक्तियों को लेकर उठ रहे सवाल औऱ गुटबाजी हावी होने की खबरों पर मोहर राजधानी भोपाल  की जिला कार्यकारिणी की घोषित सूची से मिल गया।

दरअसल मंगलवार शाम को एक साल के लंबे इंतजार के बाद भोपाल जिले की 37 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी की सूची पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से जारी की गई  लेकिन इस सूची को बाद में हटा दिया गया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, जिला अध्यक्ष रविंद्र यति और प्रदेश भाजपा के ऑफिशिलय सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट की गई सूची को डिलीट कर दिया गया। पहले सूची जारी  होना फिर चंद घंटों में उसे रद्द कर दिया जाना, इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के भीतर 'सब कुछ ठीक नहीं है।
 
नेताओं के दबदबे ने बिगाड़ा खेल-भाजपा सूत्रों के अनुसार,जिला अध्यक्ष रविन्द्र यति द्वारा जारी इस सूची पर सत्ता का सिंडिकेट हावी रहा। बताया जा रहा है कि एक वर्तमान विधायक, एक पूर्व विधायक और एक कद्दावर नेता के बीच छिडे सियासी वर्चस्व की जंग ने  पार्टी की किरकिरी करा दी। कांग्रेस की तरह अब भाजपा में भी विधायक और मंत्री संगठन को अपनी जेब की संस्था बनाने की होड़ में लगे हैं, जिसका नतीजा सड़कों पर बढ़ती अंतर्कलह के रूप में दिख रहा है।
 
विधायक-मंत्री समर्थकों की अनदेखी बनी गले की फांस- इस पूरी सूची में सबसे चौंकाने वाली  बात हुजुर विधायक रामेश्वर शर्मा के खेमे की पूरी तरह उपेक्षा रही। पार्टी के हिंदूवादी चेहरे और कद्दावर विधायक रामेश्वर शर्मा के समर्थकों को कार्यकारिणी में जगह नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। वहीं मंत्री कृष्णा गौर के समर्थकों को भी दरकिनार कर दिया गया। बताया जा रहा है इसको लेकर भाजपा विधायक और मंत्रियों ने अपना विरोध में संगठन के शीर्ष नेताओं के सामने रखा।  
 
वहीं जिला कार्यकारिणीकी सूची में जिस तरह से भाजपा, कार्यालय में तोड़फोड़ करने वालों और निर्दलीय चुनाव लड़ चुके दागियों को जगह दी गई, उसके खुलकर हुए विरोध ने संगठन को सूची वापस लेने पर मजबूर किया। रद्द की गई सूची में चार MIC सदस्यों और कुछ ऐसे पदाधिकारियों के नाम थे जिन पर पार्टी अनुशासन तोड़ने के आरोप रहे हैं। सूची में पूर्व विधायक और सांसद के एकतरफा दबाव और चयन पर विधायक और मंत्रियों न कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद आनन-फानन में सूची को सोशल मीडिया से डिलीट कर रद्द घोषित कर दिया गया।
 
प्रदेश में कांग्रेस के बारे में कहा जाता था कि वहां हर नेता का अपना गुट होता है, लेकिन सत्तारूढ पार्टी भाजपा के भोपाल संगठन की जिला कार्यकारिणी मे जिस तरह से पट्टावाद और गुटों की संस्कृति की झलक देखने को मिली,  उसने साबित कर दिया है कि भाजपा अब उसी राह पर है। भाजपा संगठन अब स्वतंत्र नहीं रहा, बल्कि सांसदों और विधायकों के रबर स्टैंप बनने की ओर अग्रसर है। 
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें
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