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Last Updated :भोपाल , शुक्रवार, 5 जून 2026 (23:10 IST)

'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान का शुभारंभ, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- प्रकृति के बिना हमारी जीवन शैली अधूरी

Ek Ped Maa Ke Naam 2.0
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस यानी 5 जून को राज्य स्तरीय समारोह  "एक पेड़ मां के नाम 2.0" का शुभारंभ किया। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने सर्कुलर इकॉनॉमी  से संबंधित 5 कोर्स मॉड्यूल्स, एप्को और इन्टैक द्वारा प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 16 जिलों की 500 बावड़ियों के दस्तावेजों का विमोचन किया।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों, सर्कुलर इकॉनॉमी और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर केंद्रित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया ने 8 श्रेणियों में 11 राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार प्रदान किए। वर्ष 2024-25 के यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा व्यक्तियों को प्रदान किए गए।  
 
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफलतम 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर 13वें वर्ष में प्रवेश किया है। इस पूरे आयोजन के पीछे प्रधानमंत्री मोदी का विजन है। हमारी सनातन संस्कृति की मूल अवधारणा, हमारी जीवन पद्धति पर्यावरण के अनुसार थी। आज पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्व हमारी तरफ देख रहा है। हमारा सौभाग्य है कि परमात्मा ने हमें 5 तत्वों से बनी सृष्टि प्रदान की है। इस सृष्टि में हमारे हर शास्त्र में विस्तार से पर्यावरण की व्याख्या की गई है। छोटे-छोटे वेद-वाक्यों में सारी बातें विस्तार से कही गई हैं। उन्होंने कहा कि 'यत पिंडे-तत ब्रह्मांडे' यानी जैसा पिंड है वैसा ही ब्रह्मांड है। 
 
हमारे यहां भोग भी तुलसी के बिना नहीं लगता
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि अगर हम अपने चारों तरफ के वातावरण को देखें, तो हमारी तो किसी भी प्रकार की पद्धति, पूजा-पाठ प्रकृति के बिना अधूरा है। हम संध्यावंदन करते हैं, सूर्य को अर्घ्य देते हैं, भगवान को लगने वाला भोग तुलसी के बिना नहीं लगता। इस बात को वैज्ञानिक तरीके से भी कहा गया है। सीएम डॉ. यादव ने वाक्या सुनाया कि भारत के महान विद्वान जगदीश चंद्र बसु को इंग्लैंड में नोबल पुरस्कार मिला, क्योंकि उन्होंने दुनिया के सामने सिद्ध किया कि पौधों में भी प्राण होते हैं। उस वक्त वहां लोगों ने उनसे कहा कि इस बात को सिद्ध करने के लिए भारत के लोग आपको सिर-आंखों पर बैठाएंगे। इस पर बसु ने उनसे कहा कि वहां गांवों तक में लोगों को पता है कि पौधों में प्राण होते हैं। आपको नहीं पता था, इसलिए मैं आपको बताने आपके बीच खड़ा हूं। भारत की जीवन-शैली तो आदिकाल से प्रकृति को साथ लेकर चली है। परिवारवाले हमें रात के समय पौधों की पत्ती तोड़ने से भी मना करते हैं। क्योंकि, वह वक्त पौधों के सोने का होता है। एक पेड़ दस पुत्रों के बराबर माना गया है। जल संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा पवित्र भाव से जल गंगा संवर्धन अभियान में नदी, कुएं, बावड़ियों और तालाबों का संरक्षण किया जा रहा है।
 
पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत हुआ भारत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाली शख्सियत होंगे। उनके ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री का पद गौरवांवित हुआ। आने वाले 4 दिनों में वे पंडित जवाहरलाल नेहरू से आगे निकल जाएंगे। यह भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 24 दलों के गठबंधन में सरकार चलाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी अनेक सौगातें देश को दी हैं। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत इतना सशक्त हुआ कि अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मुंहतोड़ जबाव देता है। वर्तमान समय में देश आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्त हुआ है। भारतीय प्रतिभाएं अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और खेल सहित सभी क्षेत्रों में दुनियाभर में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हर अवसर पर खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया है।
 
40 साल पुराना कलंक मिटाने का प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में मौसम के लिए अलनीनो और पश्चिम एशिया में विषम परिस्थियों के कारण दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल और गैस सहित ऊर्जा का संकट खड़ा हो रहा है। यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत पूरी मजबूती के साथ ऊर्जा संकट से बाहर निकल रहा है। कहीं कोई हाहाकार नहीं हो रहा। भोपाल गैस त्रासदी आम नागरिकों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सबसे भयावय घटना है। गैस त्रासदी प्रकृति से खिलवाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण थी। इसके लिए तत्कालीन सत्ताधारी दल की जबावदेही बनती है। उन्होंने गैस रिसाव के बाद सबसे बड़े जिम्मेदार को देश से निकाल दिया था। राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़ा कचरा 40 साल बाद सफलतापूर्वक निष्पादित किया है। भोपाल की धरती से गैस त्रासदी के कलंक को मिटाया। अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की भूमि का समुचित प्रबंधन करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
 
ग्रीन एनर्जी को कर रहे प्रोत्साहित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में 62 मेगावाट ग्रीन एनर्जी, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास और जल विद्युत परियोनाएं पर तेजी से कार्य किया है। खजुराहो सहित अन्य स्थानों पर ग्रीन एनर्जी के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। राज्य सरकार पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में चीतों का पुनर्वास, असम से जंगली भैंसे भी लाए गए हैं। मध्यप्रदेश वन्य प्राणियों के संरक्षण की दिशा में सहअस्तित्व के साथ सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान ने वन और खनिज संपदा के माध्यम से प्रदेश पर विशेष कृपा की है। भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का मर्दन कर विश्व को यह संदेश दिया था कि अग्नि, जल वायु, पृथ्वी और सूर्य पर सभी का समान अधिकार है। Edited by : Sudhir Sharma
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