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वोट पर मेरे ... लगी है नजर

चुनाव 2008
- राजेश सिरोठिया
बैतूल जिले में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की प्रतिष्ठता दाँव पर है। बैतूल उपचुनाव के पहले उन्होंने जिले में लोगों को वादों और ऐलानों के जो सब्जबाग दिखाए थे, उनके मैदान में अमल को लेकर मतदाताओं की पैनी निगाह है।

बैतूल जिले की मुलताई सीट पर पिछले दो चुनावों से डॉ. सुनीलम्‌ का कब्जा है। पहली बार वे निर्दलीय जीते, तो दूसरी बार सपा के टिकट पर। इस बार भी वे सपा की पताका थामे हैटट्रिक को आतुर हैं, लेकिन मासौद सीट के खत्म हो जाने से कांग्रेसी विधायक सुखदेव पांसे मुलताई से अपनी किस्मत आजमाने को विवश हैं।

परिसीमन के बाद मासौद पट्टन मुलताई में जुड़ा है और इसके साथ ही कुनबी समुदाय के बड़े मतदाताओं का समूह मुलताई से आ मिला है। मूलतः कुनबी समाज के कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे के पास 27 फीसदी कुनबी मतदाताओं का बड़ा कुनबा जुड़ गया है। पांसे की दावेदारी सुनीलम्‌ की मुसीबतें बढ़ा सकती हैं, लेकिन सर्वे में सुनीलम्‌ की बढ़त कायम है।

आमला सुरक्षित सीट पर भाजश के कारण ही कांग्रेस से भाजपा पिछड़ी है। 20 फीसदी कुनबी और 14 फीसदी गौंड आबादी वाले इस क्षेत्र में गोंगपा के विभाजन के कारण कांग्रेस मुकाबले में बनी हुई है। कांग्रेस की मौजूदा विधायक सुनीता बेले का मतदाताओं में विरोध है।

यहाँ से कांग्रेस टिकट पर मनोज मालवीय और भाजपा से लालमन पारदे, चेतराम मानेकर और गोपाल खतारे की दावेदारी है। सपा से छोटू बचले, तो गोंगपा से रमेश दामले, गोंडवाना मुक्ति संगठन से डॉ. सीएल वंशकार और जनशक्ति से कन्हैयालाल ढुलेकर तथा गुरुबक्श अतुलकर का नाम है।

बैतूल सीट पर मौजूदा विधायक शिवप्रसाद राठौर के साथ ही बैतूल उपचुनाव में जीते सांसद हेमंत खंडेलवाल और भाजश से वापस भाजपा में लौटे राजीव खंडेलवाल टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। कांग्रेस से विनोद डांगा और हेमंत बागदरे का नाम है।

छवि के असर का खतरा : घोड़ाडोंगरी सुरक्षित सीट पर मौजूदा विधायक सज्जनलाल उईके की नकारात्मक छवि के चलते भाजपा, कांग्रेस से पिछड़ रही है। यहाँ से भाजपा टिकट का सबसे तगड़ा दावा रामजीलाल उईके का है। कांग्रेस से प्रतापसिंह उईके हैं, तो गोंडवाणा से प्रेम उईके। समाजवादी जनपरिषद भी रामावतार उईके का नाम 32 फीसदी गौंड मतदाताओं वाले इस इलाके से उछाल रही है। 36 फीसदी कोरकू और 25 फीसदी गौंड आदिवासी वाली भैंसदेही सीट पर भाजपा विधायक महेंद्रसिंह चौहान की बढ़त कायम है। कांग्रेस से सतीश चौहान, रमा काकौड़िया तथा गंजन सिंह उमरे टिकट की दौड़ में हैं।

लोकप्रियता में गिरावट : पिछले डेढ़ दशक से भाजपा के खाते में चल रही हरदा सीट इस बार खतरे में हैं। राजस्व मंत्री कमल पटेल के रिश्तेदारों और समर्थकों की मनमानी के चलते एक बड़ा वोट बैंक भाजपा से छिटक गया है। भाजश ने भाजपा के ही तेजतर्रार युवा तुर्क अशोक गुर्जर को उतारा है। कमल पटेल के विकल्प के रूप में गौरीशंकर मुकाती का नाम है। हरदा जिले की टिमरनी सीट अनुसूचित जाति की बजाए अब जनजाति के लिए आरक्षित हो गई है। इससे भाजपा विधायक मनोहरलाल राठौर का बेवजह पत्ता कट गया है। इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच काँटे की लड़ाई है।

परिसीमन से आई मजबूती : होशंगाबाद जिले की सिवनी मालवा सीट पर विधानसभा उपाध्यक्ष और बुजुर्ग कांग्रेसी विधायक हजारीलाल रघुवंशी की स्थिति परिसीमन के बाद और मजबूत हो गई है। केसला ब्लॉक जुड़ने के कारण ये हालात बने हैं। रघुवंशी, लौहवंशी और गौंड यहाँ की प्रभावी जातियाँ हैं। भाजपा रघुवंशी के खिलाफ प्रेमशंकर वर्मा को लड़ाती आई है। वर्मा लगातार हारे हैं। भाजपा के सर्वे में इटारसी विधायक गिरिजाशंकर शर्मा का नाम श्रेष्ठ प्रत्याशी के रूप में आया है। होशंगाबाद शहर की सीट पर भाजपा को असरदार बढ़त हासिल है, लेकिन यह बढ़त नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र पांडे की बसपा से उम्मीदवारी के बाद कायम रह पाएगी, इसमें संदेह है।

ऐसी स्थिति में मौजूदा विधायक मधुकरराव हर्णे का टिकट बदला जाना तय लग रहा है। भाजपा से पूर्व विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा का नाम सर्वश्रेष्ठ प्रत्याशी के रूप में उभरा है, तो इटारसी विधायक गिरिजाशंकर शर्मा और विजयपाल सिंह का नाम भी आया है। खुद प्रदेश कांग्रेसाध्यक्ष सुरेश पचौरी यहाँ से सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार माने गए हैं। यदि वे यहाँ से नहीं लड़ते तो फिर माणक अग्रवाल, विजय दुबे, अम्बिका शुक्ल, रामेश्वर नीखरा और रमेश साहू के नाम हैं। जनशक्ति से प्रशांत तिवारी और शिवकिशोर रावत की दावेदारी है।

गुटबाजी घटी : इटारसी की जगह नई सीट बनी सोहागपुर में कांग्रेस को भाजपा पर मामूली बढ़त मिली है, तो उसकी वजह जनशक्ति द्वारा किया जा रहा नुकसान है। इस सीट से पिपरिया से सपा विधायक रहे अर्जुन पलया और पूर्व कांग्रेसी विधायक अम्बिका शुक्ल और सविता दीवान का नाम उभरा है। भाजपा से विजयपाल सिंह, हरी जायसवाल, मधुकर हर्णे और राजौ मालवीय के नाम हैं। जनशक्ति यहाँ से पुष्पराज पटेल को खड़ा करके भाजपा के गुर्जर वोट बैंक में सेंधमारी कर सकती है। पिपरिया सीट सुरक्षित हो जाने के कारण कांग्रेस में गुटबाजी कम हुई है। यहाँ पर भाजपा को कांग्रेस पर मामूली बढ़त ही हासिल है। भाजपा से ठाकुरदास नागवंशी का दावा है, तो कांग्रेस से तुलाराम बैमन का नाम उभरा है।

गड़बड़ाया गणित : रायसेन जिले की बरेली सीट के खत्म होने और उसका एक बड़ा हिस्सा उदयपुरा में मिलने के कारण उदयपुरा सीट पर भाजपा का गणित गड़बड़ा गया है। यहाँ कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला नजदीकी है।

दिग्गज के कारण संकट : उदयपुरा से भाजपा के दावेदारों में नरेंद्र पटेल, रामपालसिंह, शिवाजी पटेल और बरेली विधायक भगवत पटेल के नाम हैं। कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में यहाँ से भोपाल दुग्ध संघ के अध्यक्ष गिरीश पालीवाल का नाम है