अपनों पर ही तानी तलवारें
भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों में बगावती तेवर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उम्मीदवारों के नाम फाइनल हो जाने के बाद से वंचित दावेदारों ने अपनी ही पार्टी के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ तलवारें तान लीं। यदि उनका रोष नहीं थमा तो ये बागी नेता चुनाव के अखाड़े में अपने ही दल के प्रत्याशी को ढेर करने में अहम भूमिका निभाएँगे।
प्रदेश में हर स्थान पर दोनों दलों के नाराज कार्यकर्ताओं द्वारा जहाँ उम्मीदवारों के पुतले फूँके जा रहे हैं, वहीं भोपाल पहुँचकर भी वरिष्ठ नेताओं के सामने प्रदर्शन किए जा रहे हैं। आज जबकि मतदान के लिए मात्र 20 दिन शेष हैं। इतने कम समय में प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं को रिझाने से बड़ा काम गुस्साए कार्यकर्ताओं को मनाने का भी है।
अनुशासन और कॉडर का दम भरने वाली भाजपा में इस बार पिछले चुनावों की तुलना में असंतोष का लावा कुछ ज्यादा ही उबल रहा है। टिकट वितरण के पूर्व पार्टी के कर्ता-धर्ता यह कहते हुए नहीं थकते थे कि टिकट वितरण को लेकर कुछ असंतोष जरूर होता है, किंतु इसके लिए संगठन द्वारा पहले ही तैयारी कर ली गई है। असंतोष की आशंका वाले क्षेत्रों में 'सीज फायर' वाले नेताओं की पहचान कर ली गई है और टिकट की घोषणा के पहले ही उन्हें मौके पर भेज दिया जाएगा, ताकि उसे शांत किया जा सके।
अब टिकट वितरण के बाद लगता है कि भाजपा का 'सीज फायर' ही सीज हो गया। यदि पार्टी में बगावत की बात करें तो वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विक्रम वर्मा की पत्नी को टिकट दिए जाने से कार्यकर्ता खफा हैं। ये बात अलग है कि विरोध करने वालों की संख्या सीमित है पर पार्टी इस असंतोष को उबरने से रोकने में कामयाब नहीं हो सकी, जो कि किया जाना था।
उज्जैन दक्षिण और महिदपुर के कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी का पुतला ही फूँक दिया। जबलपुर में उत्तर के प्रत्याशी शरद जैन को टिकट दिए जाने से नाराज धीरज पटेरिया के समर्थकों का गुस्सा कम नहीं हो पा रहा है। यहाँ तो कार्यकर्ताओं में जूतम-पैजार तक हो चुकी है। जबलपुर की बरगी सीट से नंदनी मरावी का खास विरोध हो रहा है। डिंडौरी में भी टिकट वितरण से खासी नाराजी है।
विधायक लड़ेंगे निर्दलीय : होशंगाबाद के विधायक मधुकर हर्णे टिकट न देने से इतने गुस्साए हैं कि उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में कूदने की घोषणा कर डाली। वे नामांकन फार्म भी दाखिल कर चुके हैं। इसी प्रकार विदिशा के पूर्व विधायक ठा. मोहरसिंह के तेवर भी बगावती हो गए हैं। उनकी मुलाकात उमा भारती से हो चुकी है। वे वित्तमंत्री राघवजी के खिलाफ चुनाव में कूदने की तैयारी में हैं। बसोदा के ही पूर्व संसदीय सचिव अजयसिंह ने समर्थकों सहित पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है।
आग यहाँ भी कम नहीं : टिकट वितरण को लेकर असंतोष की आग कांग्रेस में भी कम नहीं है। हालत यह है कि असंतोष के कारण ही पार्टी द्वारा दूसरी सूची देर से जारी हो सकी। कांगे्रस नेता सुशील तिवारी के समर्थकों ने विट्ठलभाई पटेल को टिकट दिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया और नगर कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ कर डाली। इसी प्रकार कालापीपल से महेन्द्रसिंह को टिकट दिए जाने के विरोध में एक अन्य दावेदार केदारसिंह के समर्थकों ने पीसीसी के सामने प्रदर्शन किया।
धार से बालमुकुंदसिंह गौतम को उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी के अन्य गुट के लोगों ने पुतला जलाया। खास बात यह कि यह कार्रवाई तब की गई जबकि टिकट की औपचारिक घोषणा भी नहीं हुई।
सीधी में आक्रोश : वर्तमान केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अर्जुनसिंह के गढ़ सीधी में भी इस बार असंतोष के सुर उभर रहे हैं। यहाँ के चौहान और ब्राह्मण नेताओं ने अर्जुनसिंह के पुत्र प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष अजयसिंह राहुल के खिलाफ भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उनकी उपेक्षा की जा रही है।
नई राह की आशंका : कांग्रेस ने इसके साथ ही कई पुराने दिग्गजों के पर भी कतर दिए। इनमें ग्वालियर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुनसिंह के वफादार भगवानसिंह यादव, महेन्द्रसिंह चौहान दिवंगत माधवराव सिंधिया के वफादार बालेन्दु शुक्ला, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री मुकेश नायक, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मानक अग्रवाल , दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे राजा पटेरिया, मानवेन्द्रसिंह आदि शामिल हैं। इन नेताओं को टिकट न दिए जाने से पार्टी में असंतोष बढ़ने की खबरें आ रही हैं। बताया जाता है कि इन लोगों में से कई नेता बहुजन समाज पार्टी के संपर्क में हैं तथा कुछ बसपा के टिकट पर चुनावी समर में भी उतर सकते हैं।
सामाजिक असंतोष : टिकट वितरण को लेकर केवल दावेदार और उनके समर्थक ही खफा हैं, ऐसा नहीं है। कुछ समाजों में भी टिकट वितरण पर नाराजगी दिख रही है। जबलपुर साहू समाज टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज है। इसी प्रकार ब्राह्मणों में भी भाजपा के प्रति आक्रोश है और उन्होंने भाजपा को हराने का संकल्प भी किया है।
भाजश में शामिल : शहडोल संभाग की कोतमा विधानसभा से घोषित प्रत्याशियों को लेकर उठे विवाद के चलते भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष नागेन्द्रनाथसिंह ने पार्टी छोड़कर उमा भारती का दामन थामने का निर्णय कर लिया है। भाजपा का साथ छोड़ चुके सिंह 7 नवंबर को अपना पर्चा दाखिल करेंगे। (नईदुनिया)
प्रदेश में हर स्थान पर दोनों दलों के नाराज कार्यकर्ताओं द्वारा जहाँ उम्मीदवारों के पुतले फूँके जा रहे हैं, वहीं भोपाल पहुँचकर भी वरिष्ठ नेताओं के सामने प्रदर्शन किए जा रहे हैं। आज जबकि मतदान के लिए मात्र 20 दिन शेष हैं। इतने कम समय में प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं को रिझाने से बड़ा काम गुस्साए कार्यकर्ताओं को मनाने का भी है।
अनुशासन और कॉडर का दम भरने वाली भाजपा में इस बार पिछले चुनावों की तुलना में असंतोष का लावा कुछ ज्यादा ही उबल रहा है। टिकट वितरण के पूर्व पार्टी के कर्ता-धर्ता यह कहते हुए नहीं थकते थे कि टिकट वितरण को लेकर कुछ असंतोष जरूर होता है, किंतु इसके लिए संगठन द्वारा पहले ही तैयारी कर ली गई है। असंतोष की आशंका वाले क्षेत्रों में 'सीज फायर' वाले नेताओं की पहचान कर ली गई है और टिकट की घोषणा के पहले ही उन्हें मौके पर भेज दिया जाएगा, ताकि उसे शांत किया जा सके।
अब टिकट वितरण के बाद लगता है कि भाजपा का 'सीज फायर' ही सीज हो गया। यदि पार्टी में बगावत की बात करें तो वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विक्रम वर्मा की पत्नी को टिकट दिए जाने से कार्यकर्ता खफा हैं। ये बात अलग है कि विरोध करने वालों की संख्या सीमित है पर पार्टी इस असंतोष को उबरने से रोकने में कामयाब नहीं हो सकी, जो कि किया जाना था।
उज्जैन दक्षिण और महिदपुर के कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी का पुतला ही फूँक दिया। जबलपुर में उत्तर के प्रत्याशी शरद जैन को टिकट दिए जाने से नाराज धीरज पटेरिया के समर्थकों का गुस्सा कम नहीं हो पा रहा है। यहाँ तो कार्यकर्ताओं में जूतम-पैजार तक हो चुकी है। जबलपुर की बरगी सीट से नंदनी मरावी का खास विरोध हो रहा है। डिंडौरी में भी टिकट वितरण से खासी नाराजी है।
विधायक लड़ेंगे निर्दलीय : होशंगाबाद के विधायक मधुकर हर्णे टिकट न देने से इतने गुस्साए हैं कि उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में कूदने की घोषणा कर डाली। वे नामांकन फार्म भी दाखिल कर चुके हैं। इसी प्रकार विदिशा के पूर्व विधायक ठा. मोहरसिंह के तेवर भी बगावती हो गए हैं। उनकी मुलाकात उमा भारती से हो चुकी है। वे वित्तमंत्री राघवजी के खिलाफ चुनाव में कूदने की तैयारी में हैं। बसोदा के ही पूर्व संसदीय सचिव अजयसिंह ने समर्थकों सहित पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है।
आग यहाँ भी कम नहीं : टिकट वितरण को लेकर असंतोष की आग कांग्रेस में भी कम नहीं है। हालत यह है कि असंतोष के कारण ही पार्टी द्वारा दूसरी सूची देर से जारी हो सकी। कांगे्रस नेता सुशील तिवारी के समर्थकों ने विट्ठलभाई पटेल को टिकट दिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया और नगर कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ कर डाली। इसी प्रकार कालापीपल से महेन्द्रसिंह को टिकट दिए जाने के विरोध में एक अन्य दावेदार केदारसिंह के समर्थकों ने पीसीसी के सामने प्रदर्शन किया।
धार से बालमुकुंदसिंह गौतम को उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी के अन्य गुट के लोगों ने पुतला जलाया। खास बात यह कि यह कार्रवाई तब की गई जबकि टिकट की औपचारिक घोषणा भी नहीं हुई।
सीधी में आक्रोश : वर्तमान केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अर्जुनसिंह के गढ़ सीधी में भी इस बार असंतोष के सुर उभर रहे हैं। यहाँ के चौहान और ब्राह्मण नेताओं ने अर्जुनसिंह के पुत्र प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष अजयसिंह राहुल के खिलाफ भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उनकी उपेक्षा की जा रही है।
नई राह की आशंका : कांग्रेस ने इसके साथ ही कई पुराने दिग्गजों के पर भी कतर दिए। इनमें ग्वालियर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुनसिंह के वफादार भगवानसिंह यादव, महेन्द्रसिंह चौहान दिवंगत माधवराव सिंधिया के वफादार बालेन्दु शुक्ला, प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री मुकेश नायक, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मानक अग्रवाल , दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे राजा पटेरिया, मानवेन्द्रसिंह आदि शामिल हैं। इन नेताओं को टिकट न दिए जाने से पार्टी में असंतोष बढ़ने की खबरें आ रही हैं। बताया जाता है कि इन लोगों में से कई नेता बहुजन समाज पार्टी के संपर्क में हैं तथा कुछ बसपा के टिकट पर चुनावी समर में भी उतर सकते हैं।
सामाजिक असंतोष : टिकट वितरण को लेकर केवल दावेदार और उनके समर्थक ही खफा हैं, ऐसा नहीं है। कुछ समाजों में भी टिकट वितरण पर नाराजगी दिख रही है। जबलपुर साहू समाज टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज है। इसी प्रकार ब्राह्मणों में भी भाजपा के प्रति आक्रोश है और उन्होंने भाजपा को हराने का संकल्प भी किया है।
भाजश में शामिल : शहडोल संभाग की कोतमा विधानसभा से घोषित प्रत्याशियों को लेकर उठे विवाद के चलते भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष नागेन्द्रनाथसिंह ने पार्टी छोड़कर उमा भारती का दामन थामने का निर्णय कर लिया है। भाजपा का साथ छोड़ चुके सिंह 7 नवंबर को अपना पर्चा दाखिल करेंगे। (नईदुनिया)

