ये चाँदनी नहीं चार दिन की
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वेबदुनिया फीचर डेस्क जनरली ये माना जाता है कि शादी के पहले गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड रहते हुए लाइफ जितनी रोमांटिक होती है हसबैंड-वाइफ बनने के बाद वो उतनी रोमांटिक नहीं रह जाती। शादी के बाद रोमांस की बत्ती लगभग गुल हो जाती है। लेकिन अगर इंसान चाहे तो सबकुछ मुमकिन है। कोशिश करें कि रोमांस चार दिन की चाँदनी न बने। पति-पत्नी का रिश्ता सात फेरों से बँधा सात जन्मों का होता है। एक-दूसरे का हाथ थामे दो अजनबी विवाह के वचनों के साथ अपने नवजीवन की शुरुआत करते हैं जिसमें उमंग, उत्साह व उल्लास होता है।मन-वचन और कर्म से दंपति एक-दूसरे को अपनाकर फैमेली बनाते हैं। एक-दूसरे का फिजिकल एट्रैक्शन उनके रिश्तों की डोर को कुछ सालों तक मजबूती से बाँधे रखता है। उम्र के साथ-साथ यह आकर्षण भी कम होता जाता है और धीरे-धीरे अतृप्ति के कारण पति-पत्नी एक-दूसरे से कटने लगते हैं।शादी के पहले दस साल पति-पत्नी की जिंदगी एक-दूसरे के फिजिकल सेटिस्फेक्शन व बच्चों के जन्म में निकल जाते हैं और जब हसबैंड-वाइफ का एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का समय आता है तब तक वे एक-दूसरे से ऊब चुके होते हैं। हालाँकि इस रिलेशन की बुनियाद में 'सेक्स' है लेकिन उसके साथ-साथ जुड़े इमोशन्स भी। ये इमोशन्स व फीलिंग्स हमेशा वही रहना चाहिए, जो पहले थीं। खेलकर फेंका तो खिलौनों को जाता है, इंसानों को नहीं।जिंदगी रुकने का नाम नहीं है। यह तो निरंतर चलती रहे तो ही मजा है। रिश्तों पर भी यही थ्योरी लागू होती है। पति-पत्नी के रिश्ते में भी निरंतर नएपन व विविधता की आवश्यकता होती है।'
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों ....' किसी गीत की ये पंक्तियाँ दांपत्य जीवन की ताजगी बनाए रखने का सबसे बेहतरीन मंत्र भी है। अजनबी बनकर फिर से नई ताजगी के साथ जीवन की नई शुरुआत की जा सकती है। एक-दूसरे से ऊबने के बजाय क्यों न फिर से युवा बनकर जीवन में प्रेम का रंग भरा जाए। आज जरूरत है जीवन की बैटरी को चार्ज कर अपनी जीवनशैली में फिर से नयापन लाने की। हसबैंड-वाइफ को भी हक है रोमांटिक लाइफ जीने का। सो लेट्स एंजॉय योर ब्यूटीफूल रिलेशनशिप।