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ज्योतिष की 4 बातें चौंका सकती हैं आपको

रविवार,जनवरी 19, 2020
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केंद्र के स्वामी (1-4-7-10) यदि शुभ ग्रह हों तो शुभ फल नहीं देते, अशुभ ग्रह शुभ हो जाते हैं।
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सूर्य सभी ग्रहों का मुखिया है। सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र। उनके बाल और हाथ सोने के हैं। उनके रथ को सात घो़ड़े खींचते हैं
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मुकुट योग ज्योतिष में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस योग के लिए कुंडली में गुरु की स्थिति नवम से नवम में होनी अनिवार्य है। यानी आपका गुरु का अपनी राशि से नवीं राशि में स्थित होना जरूरी है।
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कुंडली यानी जन्मपत्रिका से भविष्यवाणी करना सबसे पुरातन और सटीक विज्ञान माना जाता है। जातक की कुंडली उसकी जन्मतिथि, समय, स्थान के आधार पर बनाई जाती है।
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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की भी बाल, कुमार, युवा एवं वृद्ध अवस्थाएं होती हैं। ग्रहों की ये अवस्थाएं जातक के जन्मांग फलित ठीक उसी प्रकार प्रभावित करती हैं, जैसे मानव की अवस्थाएं उसके जीवन को।
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कुंडली का सातवां घर बताता है कि आपकी शादी किस उम्र में होगी। शादी के लिए दिशा कौन सी उपयुक्त रहेगी जहां प्रयास करने पर जल्द ही शादी हो सके।
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जानिए लग्न-कुंडली से कब मिलेगा धनलाभ, कब होंगे आप मालामाल।
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संगीतज्ञ, गायक, शक्तिसाधक एवं लेखक बनने के लिए आपके हाथों में होना चाहिए निम्नलिखित योग
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ध्वनि तरंगों के माध्यम से भी उपचार किया जा सकता है।जिस प्रकार हर रोग का संबंध किसी न किसी ग्रह विशेष से होता है उसी प्रकार संगीत की हर ध्वनि या हर सुर व राग का संबंध किसी न किसी ग्रह से अवश्य होता है।
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किसी भी व्यक्ति के हाथ के गहन अध्ययन द्वारा उस व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों के बारे में आसानी से बताया जा सकता है।
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ज्योतिष में कैंसर जैसे भयानक रोग की उत्पत्ति में कौन-कौन से ग्रहों का प्रभाव रहता है इसे जाना जा सकता है। ज्योतिष में श्वेत रक्तकण के लिए कर्क राशि का स्वामी चंद्र ग्रह तथा लाल रक्तकण के लिए मंगल ग्रह सूचक है।
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प्राचीन समय में कुंडली मिलान अत्यावश्यक माना जाता था। वर्तमान सूचना और प्रौद्योगिकी के दौर में मेलापक केवल एक रस्म-अदायगी बनकर रह गया है।
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कालसर्प दोष एक ऐसा दुर्योग है जिसका नाम सुनते ही जनमानस में भय व चिंता व्याप्त हो जाती है। कुछ विद्वान इसे सिरे से नकारते हैं, तो कुछ इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं।
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जब मैं किसी की जन्म पत्रिका का अध्ययन करने के उपरांत उन्हें किसी ग्रह की शांति करने हेतु पूजा विधान या उपाय करने को कहता हूं तो उनमें से
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एक प्रश्न ज्योतिषियों से अक्सर पूछा जाता है कि 'जब एक ही समय पर विश्व में कई बच्चे जन्म लेते हैं, तो उनकी जन्मकुंडली एक जैसी होने के बावजूद उनका जीवन भिन्न कैसे होता है?
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सामान्यत: किसी भी जातक की जन्म पत्रिका में लग्न चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में से किसी भी एक भाव में मंगल का स्थित‍ होना 'मांगलिक दोष' कहलाता है।
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आइए जानें कुंडली के कौन से योग आपको वाहन और घर का सुख दे सकते हैं और इन्हें पाने के लिए क्या किया जा सकता है?
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सूर्य पर्वत यदि पूर्णरूपेण उन्नत, विकसित तथा आभायुक्त हो तो ऐसा जातक उच्च स्थान पर पहुंचने वाला होता है। ऐसा जातक हंसमुख तथा मित्रों में घुल-मिलकर चलने वाला होता है।
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अगर आप थोड़ा भी ज्योतिष जानते हैं तो अपनी जन्मकुंडली में धनवान होने के योग स्वयं देख सकते हैं। जानिए कुछ प्रमुख चमत्कारी धनवान योग-
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