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शुक्र यदि है पहले भाव में तो रखें ये 5 सावधानियां, करें ये 5 कार्य और जानिए भविष्य

गुरुवार,मार्च 19, 2020
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शनि ग्रह के लिए तीन तरह की अंगूठी होती है, पहला नीलम की अंगूठी, दूसरा लोहे की अंगूठी और तीसरा घोड़े के नाल की अंगूठी। लोहे के छल्ले या अंगुठी को शनि का छल्ला कहा जाता है। यहां लाल किताब के अनुसार लोहे की अंगूठी पहनने के 10 नियम जानिए।
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पहले खाने में गुरु का होना अर्थात गद्दी पर बैठा साधु, राजगुरु या मठाधीश समझो। ऐसे जातक की जैसे-जैसे शिक्षा बढ़ेगी दौलत भी बढ़ती जाएगी। यदि गुरु पहले भाव में है तो दौलत का असर खतम, लेकिन अपने हुनर से प्रसिद्ध पा सकता है।
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कन्या और मिथुन राशि के स्वामी बुध ग्रह कन्या में उच्च, मीन में नीच का होता है। लाल किताब में छठे भाव में शनि बली और बारहवें भाव में मंदा होगा। चंद्र और मंगल के साथ एवं इनकी राशियों में बुरा फल देता है। लेकिन लेकिन यहां पहले घर में होने या मंदा होने ...
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हमारी अंगुलियों के पोरों में शंख या चंक्र रहते हैं। किसी के पोरों के 2 या 3 चक्र रहते हैं तो किसी के पोरों में रहते ही नहीं है। कहते हैं कि सभी अंगुलियों में चक्र होने का अर्थ है कि व्यक्ति चक्रवर्ती सम्राट की तरह जीवन व्यतीत करेगा। आओ जानते हैं इस ...
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ज्योतिष शास्त्र के फलित में अनेक ग्रहयोग व युतियों का प्रभाव होता है। कुछ योग सुप्रसिद्ध योगों की श्रेणी में आते हैं जिन्हें राजयोग कहा जाता है। लेकिन जन्म पत्रिका में कुछ ग्रहयोग ऐसे भी होते हैं
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ज्योतिष एक वृहद शा स्त्र है। कोई भी पंडित पूर्ण ज्ञानी नहीं है फिर भी कुछ बातें शास्त्रों में ऐसी मिलती है जो हमें चौंका सकती है। हम लाए हैं सिर्फ 4 जरूरी बातें आपके लिए...
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केंद्र के स्वामी (1-4-7-10) यदि शुभ ग्रह हों तो शुभ फल नहीं देते, अशुभ ग्रह शुभ हो जाते हैं।
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सूर्य सभी ग्रहों का मुखिया है। सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र। उनके बाल और हाथ सोने के हैं। उनके रथ को सात घो़ड़े खींचते हैं
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मुकुट योग ज्योतिष में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस योग के लिए कुंडली में गुरु की स्थिति नवम से नवम में होनी अनिवार्य है। यानी आपका गुरु का अपनी राशि से नवीं राशि में स्थित होना जरूरी है।
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कुंडली यानी जन्मपत्रिका से भविष्यवाणी करना सबसे पुरातन और सटीक विज्ञान माना जाता है। जातक की कुंडली उसकी जन्मतिथि, समय, स्थान के आधार पर बनाई जाती है।
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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की भी बाल, कुमार, युवा एवं वृद्ध अवस्थाएं होती हैं। ग्रहों की ये अवस्थाएं जातक के जन्मांग फलित ठीक उसी प्रकार प्रभावित करती हैं, जैसे मानव की अवस्थाएं उसके जीवन को।
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कुंडली का सातवां घर बताता है कि आपकी शादी किस उम्र में होगी। शादी के लिए दिशा कौन सी उपयुक्त रहेगी जहां प्रयास करने पर जल्द ही शादी हो सके।
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जानिए लग्न-कुंडली से कब मिलेगा धनलाभ, कब होंगे आप मालामाल।
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संगीतज्ञ, गायक, शक्तिसाधक एवं लेखक बनने के लिए आपके हाथों में होना चाहिए निम्नलिखित योग
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ध्वनि तरंगों के माध्यम से भी उपचार किया जा सकता है।जिस प्रकार हर रोग का संबंध किसी न किसी ग्रह विशेष से होता है उसी प्रकार संगीत की हर ध्वनि या हर सुर व राग का संबंध किसी न किसी ग्रह से अवश्य होता है।
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किसी भी व्यक्ति के हाथ के गहन अध्ययन द्वारा उस व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों के बारे में आसानी से बताया जा सकता है।
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ज्योतिष में कैंसर जैसे भयानक रोग की उत्पत्ति में कौन-कौन से ग्रहों का प्रभाव रहता है इसे जाना जा सकता है। ज्योतिष में श्वेत रक्तकण के लिए कर्क राशि का स्वामी चंद्र ग्रह तथा लाल रक्तकण के लिए मंगल ग्रह सूचक है।
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प्राचीन समय में कुंडली मिलान अत्यावश्यक माना जाता था। वर्तमान सूचना और प्रौद्योगिकी के दौर में मेलापक केवल एक रस्म-अदायगी बनकर रह गया है।
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कालसर्प दोष एक ऐसा दुर्योग है जिसका नाम सुनते ही जनमानस में भय व चिंता व्याप्त हो जाती है। कुछ विद्वान इसे सिरे से नकारते हैं, तो कुछ इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं।
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