प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सके मुरली कार्तिक

नई दिल्ली| Last Updated: गुरुवार, 11 सितम्बर 2014 (19:33 IST)
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नई दिल्ली। भारतीय किक्रेट में बाएं हाथ के स्पिनर को एक ऐसे किक्रेटर के तौर पर जाना जाता है, जो भरपूर प्रतिभा होने के बावजूद मिले मौकों पर फायदा नहीं उठा पाए और समय से पूर्व ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया। 
भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्पिन गेंदबाजों ने टीम को कई स्वर्णिम सफलताएं दिलाई हैं और एक समय ऐसा था जब विश्व क्रिकेट में भारतीय स्पिन आक्रमण से बड़ी-बड़ी टीमों के बल्लेबाज भी खौफ खाते थे। 
 
प्रसन्ना, चंद्रशेखर, वेंकटराघवन, बिशन सिंह बेदी तक और फिर नब्बे के दशक में नरेन्द्र हिरवानी, वेंकटपति राजू, राजेश चौहान और अनिल कुंबले ने विदेशों टीमों के बल्लेबाजों की नाक में दम कर दिया। कुम्बले के संन्यास के बाद भारतीय स्पिन आक्रमण ने एक शून्यता आ गई है। पिछले एक दशक के दौरान भारतीय टीम में कई स्पिनर अंदर-बाहर होते रहे लेकिन उनमें स्थायीत्व का अभाव रहा। 
 
मुरली कार्तिक का जन्म वर्ष 11 सितंबर 1976 को तत्कालीन मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। मुरली ने टेस्ट के अलावा एकदिवसीय और ट्वंटी-20 में भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। अन्य क्रिकेटरों की भांति मुरली के करियर में कई बार उतार-चढ़ाव का दौर आया और इस दौरान वे टीम के अंदर तो कभी बाहर होते रहे। 
 
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फरवरी 2000 में अपना टेस्ट पदार्पण करने वाले खब्बू गेंदबाज कार्तिक ने टेस्ट टीम में आने से पहले घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था। हालांकि पदार्पण टेस्ट में कार्तिक का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा और पहली पारी में दो और दूसरी पारी में महज एक विकेट ही ले पाए। दक्षिण अफ्रीका ने यह टेस्ट चार विकेट से जीत लिया। उन्होंने टेस्ट पदार्पण के दो साल बाद वर्ष 2002 में जिम्बाबे के खिलाफ एक दिवसीय मैचों में भारत की कैप पहनी थी। 
 
मुरली ने करीब आठ वर्षों के अपने क्रिकेट करियर में आठ टेस्ट, 37 एकदिवसीय और एक टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। उन्होंने आठ टेस्ट मैचों में 24 विकेट जबकि 37 एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में 37 विकेट अपने नाम किए। एकमात्र टी-20 में मुरली को कोई विकेट हाथ नहीं लगा। एक समय मुरली को बाएं हाथ की गेंदबाजी का अच्छा विकल्प माना जाता था लेकिन प्रदर्शन में निरतंरता के अभाव में वे टीम से लगातार अंदर-बाहर होते रहे। 
 
अंतराष्ट्रीय मैचों में मुरली का प्रदर्शन भले ही उनकी प्रतिभा को प्रदर्शित नहीं करता हों लेकिन 203 प्रथम श्रेणी मैचों में 644 विकेट उनकी प्रतिभा की सही झलक जरूर दिखाते हैं। 
 
बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज ने इसी वर्ष जून में प्रथम श्रेणी सहित क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। (वार्ता)



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