कुंडली में है सूर्य ग्रहण तो लाल किताब के 10 अचूक उपाय, पितृदोष भी खत्म हो जाएगा

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ऐसा कहा जाता है कि सूर्य के पीड़ित होने से पितृदोष भी बनता है और सूर्य के राहु के साथ होने से सूर्य ग्रहण दोष उत्पन्न होता है। सूर्य ग्रहण कुंडली के किसी भी भाव, खाने या घर में हो तो वह उस भाव के फल खराब कर देता है। ऐसे में उसके उपाय करना जरूरी है।

क्या होता है सूर्य ग्रहण : लाल किताब के अनुसार सूर्य का राहु के साथ किसी भी प्रकार से संबंध है तो इसे सूर्य ग्रहण माना जाएगा। यदि लग्न में राहु बैठा है तो सूर्य कहीं भी हो उसे ग्रहण होगा। लाल किताब के अनुसार शुक्र और बुद्ध एक ही जगह हैं, तो वे सूर्य हैं और उनके साथ राहु है तो सूर्य ग्रहण होगा। लाल किताब के अनुसार जब किसी कुण्डली में शुक्र, बुध या राहु इकट्ठे दूसरे, पांचवें, नौवें अथवा बारहवें भाव में हों तो जातक पितृ दोष से पीड़ित माना जाता है। मतलब यह कि सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य के साथ राहु-केतु के आ जाने पर ग्रहण माना जाएगा।

सूर्य ग्रहण का प्रभाव :
1.सूर्यग्रहण से व्यक्ति कभी भी जीवन में स्टेबल नहीं हो पाता है।
2.हड्डियां कमजोर हो जाती है और आत्मविश्वास में कमी हो जाती है।
3.पिता से सुख भी नहीं मिलता और राज या सरकार की ओर से दंड मिलता है।
4.शरीर में अकड़न, मुंह में थूक बना रहना या लकवा मार जाता है।
5.यदि घर पर या घर के आसपास लाल गाय या भूरी भैंस है, तो वह खो या मर जाती है।
6.यदि सूर्य और शनि एक ही भाव में हों, तो घर की स्त्री को कष्ट होता है।
7.यदि सूर्य और मंगल साथ हों और चन्द्र और केतु भी साथ हों, तो पुत्र, मामा और पिता को कष्ट होता है।
8.गृह कलह, असफलता, विवाह में देरी, संतान में देरी, संतान से पीड़ा ये सभी सूर्य ग्रहण के प्रभाव है।


सूर्य ग्रहण के लिए 5 उपाय :
1. गेहूं, गुड़ व तांबे का दान दें।
2. पति-पत्नी में से किसी एक को गुड़ से परहेज करना चाहिए।
3. छह नारियल अपने सिर पर से वार कर जल में प्रवाहित करें।
4. मुफ्त की चीज़ न लें। अंधे व्यक्ति की सहायता करें।
5. मां का आशीर्वाद सदैव लें और चावल-दूध का दान करें।
6. जौ को दूध या गौ मूत्र से धोकर बहते पानी में बहाएं।
7. प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। मांस-मदिरा से दूर रहें और आचरण को शुद्ध रखें।
8. यदि आपके पड़ोस या घर में कोई पीपल का पेड़ हो तो उसे पानी दें और उसकी सेवा करें।
9. सूर्य-केतु की युति होने पर सूर्य ग्रहण के समय तिल, नींबू, पका केला बहते पानी में बहाएं।
10. परिवार के सभी सदस्यों से सिक्के के रूप में पैसे इकट्ठा करें और किसी दिन पूरे पैसे मंदिर में दान कर दें।

ज्योतिष के अनुसार ये भी कर सकते हैं:-
1.आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें
2.सूर्य को जल चढ़ाएं अर्थात अर्घ्य दें।
3.एकादशी और रविवार का व्रत रखें।


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