-डॉ. सुकीर्ति भटनागर काश! अगर मैं चिड़िया होती, दूर-दूर उड़ जाती। घूम-घाम कर दूर गगन में, अपना मन बहलाती।। ऊपर से कैसी दिखती है, प्यारी धरती सारी। कैसे दिखते नदी, झील सब, खेत, बाग, फुलवारी।। गहरा सागर, ऊंचे पर्वत, कैसे दिखते होंगे? हरियाली के बीच नदी में धीमे तिरते...