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बर्लिन में बना जर्मनी का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
Berlin – New Hindu Tempel: बर्लिन और पूरे जर्मनी में हिंदू समुदाय के लिए रविवार 7 जून का दिन, एक बहुत ही विशेष दिन था। उस दिन, जर्मनी की राजधानी बर्लिन, एक नए अपूर्व आकर्षण की धनी बन गई।
20 वर्षों से भी ज़्यादा समय की योजना और निर्माणकार्य पूरा होने के बाद, 7 जून 2026 के दिन, बर्लिन के "नोएकौएल्न" (नवकोलोन) नाम के उपनगर में, गणेश जी को समर्पित एक नए भव्य हिंदू मंदिर का— उनकी मूर्ति की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा और मंदिर की इमारत के अभिषेक के साथ— भव्य उद्घाटन हुआ।
अभिषेक समारोह के दौरान, तीन पुजारियों में से एक ने, एक ऊँचे क्रेन की सहायता से मंदिर के शिखर पर बर्लिन की स्प्रे नदी और भारत की गंगा नदी के मिश्रित पानी का जलार्पण किया। बर्लिन, जर्मनी की राजधानी होने के साथ-साथ जर्मनी का एक राज्य भी है। इसीलिए, मंदिर के उद्घाटन समारोह में बर्लिन राज्य के दो मंत्री और जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते भी उपस्थित थे।
निर्माण पूरी तरह दान के पैसे से
17 मीटर से भी अधिक ऊँचाई वाला यह मंदिर अब जर्मनी में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। उसका का निर्माण पूरी तरह दान के पैसे और लोगों द्वारा स्वैच्छिक सेवा के बल पर किया गया है। उसे बनाने वाली पंजीकृत संस्था "श्री-गणेश-हिंदू-मंदिर .V." के प्रमुख विल्वानाथन कृष्णमूर्ति ने मीडिया को बताया कि यह "श्री गणेश हिंदू मंदिर" शनिवार से ही लोगों के लिए खुल गया: मंदिर में सभी का गर्मजोशी से स्वागत है। इस मंदिर के निर्माण की योजना 20 साल से भी पहले बनी थी और निर्माणकार्य 2010 में शुरू हुआ था। निर्माण का ख़र्च, जो लगभग 11 लाख यूरो के बराबर है (1 यूरो=111रूपये), केवल दान के ज़रिए जुटाया गया।
निर्माण कार्य में विलंब
2005 की शुरुआती योजनाओं के अनुसार, निर्माण कार्य 2007 के अंत में शुरू होना और मंदिर 2010 तक बन कर पूरा होना था। 4 नवंबर 2007 के दिन मंदिर की नींव रखने का पहला समारोह हुआ, लेकिन उसके बाद निर्माण कार्य वास्तव में शुरू नहीं हो पाया। 2010 में निर्माण की सरकारी स्वीकृति जब मिल गई, तो उसी साल सितंबर में मंदिर की नींव रखने का दूसरा समारोह हुआ।
इसके बाद, सितंबर 2011 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन चंदा कम मिलने के कारण ऐसा हो नहीं सका। एक वर्ष बाद, 2012 में ही "राजा गोपुरम" कहलाने वाले प्रवेश द्वार के लिए नींव और खंभे आदि खड़े किए जा सके। 2013 में निर्माण अनुमति की समय-सीमा ख़त्म होने के बाद, नई अनुमति के लिए एक नया आवेदन करना पड़ा। हालांकि, 2024 में काम पूरा होने की तारीख तय की गई थी, लेकिन उस समय तक काम पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए अगली समय-सीमा अक्टूबर 2025 तय की गई।
यूरोप में अपनी तरह का सबसे बड़ा मंदिर
बर्लिन में बना यह भव्य मंदिर पूरे, यूरोप में अपनी तरह के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। मंदिर की 17 मीटर ऊँची सुनहरी छत, दक्षिण भारतीय कारीगरों द्वारा बनाई गई शानदार नक्काशी-भरी कलाकृति है। मंदिर की दीवारों वाले नीले रंग के बाहरी हिस्से पर सजावटी पैटर्न और देवी-देवताओं की आकृतियाँ बनी हुई हैं। पूजा-स्थल का अंदरूनी हिस्सा भी बहुत शानदार ढंग से डिज़ाइन किया गया है। प्रवेश द्वार को हाथ से पेंट की गई 250 आकृतियों से सजाया गया है। पूजा स्थल के अंदरूनी हिस्से को भी शानदार ढंग से डिज़ाइन किया गया है। इसमें गणेश जी को समर्पित मुख्य वेदी के साथ-साथ कई अन्य वेदियाँ भी हैं—जो शिव, विष्णु और दुर्गा जैसे देवी-देवताओं को समर्पित हैं—और जिनकी रक्षा रक्षकों की भव्य आकृतियाँ करती हैं। बर्लिन में यह दूसरा और पूरे यूरोप में गणेश जी को समर्पित संभवतः एकमात्र मंदिर है।
2080 तक के लिए मिली है ज़मीन
गणेश जी ऊर्जा और बुद्धिमत्ता के प्रतीक माने जाते हैं। मंदिर की प्रायोजक संस्था के प्रमुख विल्वानाथन कृष्णमूर्ति के अनुसार, श्री गणेश मंदिर लगभग 850 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला है, जबकि वर्ष 2080 तक मंदिर के लिए मिली पूरी ज़मीन लगभग 5,000 वर्ग मीटर के बराबर है। इससे पहले बर्लिन में जो एकमात्र हिंदू मंदिर था और अब भी है, वह 2013 में बना था और "श्री मयूरपति मुरुगन मंदिर" कहलाता है। वह मुख्य रूप से श्रीलंका में 1983 से 2009 तक चले "तमिल टाइगर्स" वाले गृहयुद्ध के समय, वहां से यूरोप और जर्मनी में आए तमिल शरणार्थियों का बनाया मंदिर है।
श्रीलंकाई तमिलों ने ही जर्मनी के नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया राज्य के "हाम" (Hamm) शहर में, जर्मनी में पहला हिंदू मंदिर बनाया था। दक्षिणी भारत के कांचीपुरम में स्थित कामाक्षी देवी के मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित "श्री कामाक्षी अम्पाल" नाम के इस मंदिर का उद्घाटन 7, जुलाई 2002 के दिन हुआ था। अर्किटेक्ट (वस्तुकार) थे, जर्मनी के हाइंस-राइनर आइशहोर्स्ट। हाम के तमिल-हिंदू मंदिर को पूरे यूरोप में सबसे बड़ा द्रविड़ मंदिर माना जाता है।
बर्लिन में हिदुओं की अनुमानित संख्या 45,000
किसी को भी ठीक-ठीक नहीं पता कि लगभग 40 लाख की जनसंख्या वाले बर्लिन में कितने हिंदू रहते हैं। श्री गणेश मंदिर की निर्माता संस्थ केप्रमुख विल्वानाथन कृष्णमूर्ति का अनुमान है कि बर्लिन में हिदुओं की संख्या 45,000 तक हो सकती है। हाल ही में इस संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण भारत से आए छात्र और आईटी (IT) पेशेवर माने जाते हैं। 8 करोड़ 41 लाख की जनसंख्या वाले पूरे जर्मनी में भी अनुमानतः क़रीब केवल 2 लाख ही भारतीय रहते हैं, जिनमें से अनुमानतः1 लाख हिंदू हैं।
मंदिर के उद्घाटन समारोह के समय बताया गया कि उस के दरवाज़े रोज़ शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक सबके लिए खुले रहेंगे। सुबह और शाम की आरती में शामिल होने के लिए किसी पंजीकरण या प्रवेश फ़ीस की ज़रूरत नहीं होगी। यह मंदिर हर हिंदू परंपरा—वैष्णव, शैव, शाक्त, स्मार्त—और यहाँ आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत करेगा: बर्लिन के परिवारों, छात्रों, अलग-अलग धर्मों के लोगों, आस-पास के कार्यालयों के कर्मचारियों तथा "ओपन डे" पर आने वाले स्कूली बच्चों की टोलियों का भी स्वागत है।
संस्कारी अनुष्ठान संस्कृत, तमिल या हिंदी में
मंदिर के पुजारी नामकरण संस्कार, स्कूल जाने की शुरुआत, शादी और गृह-प्रवेश की पूजा जैसे अवसरों के लिए उलब्ध रहेंगे। वे संस्कारी अनुष्ठान संस्कृत, तमिल या हिंदी में करवाते हैं— साथ में जर्मन या अंग्रेज़ी अनुवाद भी होता है। संस्कृत भाषा सीखने की हर हफ़्ते क्लास लगेगी। संस्कृत की पहले से कोई जानकारी होना ज़रूरी नहीं है। बच्चे और बड़े, सब साथ-साथ सीख सकते हैं। हार्मोनियम और तबले के साथ गाना- बजाना सीखने की भी सुविधा होगी। त्योहारों के दिन "अन्नदान" होगा— सभी मौजूद लोगों के लिए गर्म भोजन होगा— चाहे वे भक्त हों या अचानक आए आगंतुक।
बर्लिन का बहुचर्चित और उतना ही प्रतीक्षित मंदिर तो अंततः बन गया; उसके निर्मातओं को अब एक ऐसा "अंतर-सांस्कृतिक मिलन-केंद्र" बनाने का विचार ललचा रहा है, जिसका उद्देश्य बर्लिन की अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के बीच पारस्परिक संवाद को बढ़ावा देना होगा। यह एक ऐसा विचार है, जो अन्यथा अन्य धर्मों वाले लोगों और उनके धर्माधिकारियों के मन में नहीं आता। अन्य धर्मी यही मानते हैं कि केवल उनका धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है। अतः जो उनके सहधर्मी नहीं हैं, वे उनके धर्म को अपनाएं।
