suvichar

कविता : लोरी रोज सुनाए चिड़िया...

Updated: बुधवार, 7 जून 2017 (16:42 IST)
-आचार्य बलवन्त
 
मीठी-मीठी, प्यारी-प्यारी, लोरी रोज सुनाए चिड़िया,
दूर देश अनजानी नगरी की भी, सैर कराए चिड़िया।
 
खेतों-खलिहानों में जाकर, दाने चुगकर लाए चिड़िया,
बैठ घोसले में चूं-चूं कर, खाए और खिलाए चिड़िया।
 
अपने मधुमय कलरव से, प्राणों में अमृत घोले चिड़िया,
अपनी धुन में इस डाली से, उस डाली पर डोले चिड़िया।
 
अपनी इस अनमोल अदा से, सबका दिल बहलाए चिड़िया,
दूर देश अनजानी नगरी की भी, सैर कराए चिड़िया।
 
नन्ही-नन्ही आंखों से, आंखों की भाषा बोले चिड़िया‍,
आहिस्ता-आहिस्ता सबके मन के भाव टटोले चिड़िया।
 
तिनका-तिनका चुन-चुनकर, सपनों का नीड़ सजाए चिड़िया,
दूर देश अनजानी नगरी की भी, सैर कराए चिड़िया।
 
जीवन की हर कठिनाई को सहज भाव से झेले चिड़िया,
हर आंगन में उछले-कूदे, हर आंगन में खेले चिड़िया।
 
आपस में मिल-जुलकर रहना, हम सबको सिखलाए चिड़िया,
दूर देश अनजानी नगरी की भी, सैर कराए चिड़िया। 
 
जाति-पाति और ऊंच-नीच का, भेद न मन में लाए चिड़िया,
सारे काम करे निष्ठा से, अपना धर्म निभाए चिड़िया।
 
उम्मीदों के पर पसारकर, नील गगन में गाए चिड़िया,
दूर देश अनजानी नगरी की भी, सैर कराए चिड़िया।

साभार- देवपुत्र 
 
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

80s retro look trend : 80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

हिंदी दिवस 2026: हिंदी नहीं रही अब पहले जैसी, फिर भी दुनिया में बढ़ता जा रहा इसका दबदबा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कृष्ण मोहन झा की किताब "डा मोहन भागवत संदेश" का विमोचन

पेरिस में बना यूरोप का सबसे बड़ा अक्षरधाम मंदिर

ब्रिक्स से भारत क्या हासिल कर सकता है...?

अगला लेख