बच्चों की मनोरंजक कविता : काम नहीं रुकता
कहा एक दिन दाल बहिन ने,
छुट्टी आज मनाऊंगी।
किसी थाल में चावल के संग,
आज नहीं मैं जाऊंगी।
चावल बोला अरी निगोड़ी,
क्यों घमंड इतना करती,
बोली है तरकारी मुझसे,
हर दम साथ निभाऊंगी।
क्यों डरते हो चावल भैया,
मैं तेरी हमराही हूं,
बहिन कढ़ी भी यह बोली है,
काम तुम्हारे आऊंगी।
कभी किसी के बिना जगत का,
काम नहीं रुकता भाई।
एक छोड़ दे साथ अगर तो,
मदद दूसरे से आई।
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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512)....
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