पूरब के पर्वत से झांका, लाल-लाल सूरज का गोला। मैं बिस्तर से उठ बैठा हूं, सुबह हो गई, मुन्ना बोला। मैं भी उठकर बैठ गई हूं, मुनियां चिल्लाई भीतर से। मुन्ना भैया, चलो घूमने, जल्दी निकलो बाहर घर से। बाहर ठंडी हवा मिलेगी, फूल मिलेंगे मुस्काते से। डाल-डाल...