suvichar
✕

कविता : देखो तो शाला जाकर

Updated: बुधवार, 20 सितम्बर 2017 (15:29 IST)
डॉ.प्रमोद सोनवानी "पुष्प"
करके जल्दी से तैयारी,
शाला पढ़ने जाएंगे।
चित्र बने हैं जहां मनोहर,
मन अपना बहलाएंगे।
 
पुस्तक-कॉपी लेकर झटपट,
सीधे शाला जाना है।
ध्यान लगाकर सच्चे मन से,
सबक हमें तो पढ़ना है।
 
कितना अच्छा मिलता भोजन,
देखो तो शाला जाकर।
खेल-कूद भी तरह-तरह के,
देखो तो शाला जाकर।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

भगवान के ठेकेदार और चमत्कार का कारोबार, सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर फैलता अंधविश्वास

फ्रांस में हिंसक छात्र प्रदर्शन, हर तीन में से एक स्कूल प्रभावित

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: यदि दयालुता हमारा स्वभाव है, तो हिंसा कहाँ से आती है?

वरिष्ठ अधिकारी चक्रपाणि दत्त मिश्र की पुस्तक 'कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899' का गौरवमयी विमोचन

अगला लेख