पर्युषण 2025: दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण महापर्व पर होगी 10 धर्म की आराधना
Daslakshan Mahaparv 2025: दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण महापर्व 28 अगस्त 2025 से शुरू हो गए हैं तथा ये पर्व 6 सितंबर 2025 तक चलेगा। इस महापर्व को पर्युषण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जो आत्मा की शुद्धि और आत्म-साधना के लिए समर्पित है। इसमें दस श्रेष्ठ गुणों की आराधना की जाती है।
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दसलक्षण महापर्व का महत्व: यह पर्व जैन धर्म में आध्यात्मिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। पर्युषण शब्द 'परि' (चारों ओर से) और 'उषन' (रहना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है अपनी आत्मा में रहना या आत्मा के निकट होना। दसलक्षण पर्व दस दिनों तक चलता है, जिसमें हर दिन एक विशेष धर्म का पालन किया जाता है।
• उत्तम क्षमा: मन से क्रोध का त्याग करना।
• उत्तम मार्दव: अभिमान का त्याग कर विनम्रता को अपनाना।
• उत्तम आर्जव: छल-कपट छोड़कर मन, वचन और कर्म में सरलता लाना।
• उत्तम सत्य: हमेशा सच बोलना।
• उत्तम शौच: लोभ से मुक्त होकर मन और शरीर की पवित्रता बनाए रखना।
• उत्तम संयम: इंद्रियों और मन को नियंत्रित करना।
• उत्तम तप: इच्छाओं को नियंत्रित करने के लिए तपस्या और उपवास करना।
• उत्तम त्याग: बाहरी वस्तुओं और आसक्तियों का त्याग करना।
• उत्तम आकिंचन्य: सांसारिक संपत्ति के प्रति मोह न रखना।
• उत्तम ब्रह्मचर्य: शारीरिक और मानसिक शुद्धता का पालन करना।
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