सम्बंधित जानकारी
- मिच्छामि दुक्कड़म् 2025: संवत्सरी महापर्व पर अपनों को भेजें दिल को छू लेने वाले ये 10 क्षमायाचना संदेश
- Micchami Dukkadam 2025: संवत्सरी महापर्व पर क्यों कहतें हैं मिच्छामि दुक्कड़म्, जानें खास जानकारी
- पर्युषण महापर्व 2025 के शुभ अवसर पर अपनों को भेजें ये 10 शुभकामना संदेश
- पर्युषण महापर्व 2025: जानें धार्मिक महत्व और जैन धर्म के 5 मूल सिद्धांत
- जैन पर्युषण पर्व पर भेजें ये सुंदर 10 स्टेटस
Paryushan Parv 2025:पर्युषण 2025, दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण महापर्व पर होगी 10 धर्म की आराधना
Daslakshan Mahaparv 2025: दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण महापर्व 28 अगस्त 2025 से शुरू हो गए हैं तथा ये पर्व 6 सितंबर 2025 तक चलेगा। इस महापर्व को पर्युषण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जो आत्मा की शुद्धि और आत्म-साधना के लिए समर्पित है। इसमें दस श्रेष्ठ गुणों की आराधना की जाती है।ALSO READ: जैन पर्युषण पर्व पर भेजें ये सुंदर 10 स्टेटस
दसलक्षण महापर्व का महत्व: यह पर्व जैन धर्म में आध्यात्मिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। पर्युषण शब्द 'परि' (चारों ओर से) और 'उषन' (रहना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है अपनी आत्मा में रहना या आत्मा के निकट होना। दसलक्षण पर्व दस दिनों तक चलता है, जिसमें हर दिन एक विशेष धर्म का पालन किया जाता है।
जानें दसलक्षण के दस धर्म:
ये दसों धर्म जैन मुनियों और गृहस्थों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनका पालन कर वे अपने जीवन में आत्म-शुद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं। दसलक्षण महापर्व के दौरान जिन दस धर्मों की आराधना की जाती है, वे इस प्रकार हैं:ALSO READ: पर्युषण महापर्व 2025 के शुभ अवसर पर अपनों को भेजें ये 10 शुभकामना संदेश
ये दसों धर्म जैन मुनियों और गृहस्थों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनका पालन कर वे अपने जीवन में आत्म-शुद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं। दसलक्षण महापर्व के दौरान जिन दस धर्मों की आराधना की जाती है, वे इस प्रकार हैं:ALSO READ: पर्युषण महापर्व 2025 के शुभ अवसर पर अपनों को भेजें ये 10 शुभकामना संदेश
• उत्तम क्षमा: मन से क्रोध का त्याग करना।
• उत्तम मार्दव: अभिमान का त्याग कर विनम्रता को अपनाना।
• उत्तम आर्जव: छल-कपट छोड़कर मन, वचन और कर्म में सरलता लाना।
• उत्तम सत्य: हमेशा सच बोलना।
• उत्तम शौच: लोभ से मुक्त होकर मन और शरीर की पवित्रता बनाए रखना।
• उत्तम संयम: इंद्रियों और मन को नियंत्रित करना।
• उत्तम तप: इच्छाओं को नियंत्रित करने के लिए तपस्या और उपवास करना।
• उत्तम त्याग: बाहरी वस्तुओं और आसक्तियों का त्याग करना।
• उत्तम आकिंचन्य: सांसारिक संपत्ति के प्रति मोह न रखना।
• उत्तम ब्रह्मचर्य: शारीरिक और मानसिक शुद्धता का पालन करना।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: पर्युषण महापर्व 2025: जानें धार्मिक महत्व और जैन धर्म के 5 मूल सिद्धांत
