भारत में बढ़ रहे हैं साइबर अपराध
-प्रसून सोनवलकर
लंदन, ब्रिगटंन यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन के बाद दावा किया कि भारत तेजी से साइबर अपराध की धुरी के तौर पर उभर रहा है और इस देश में चलने वाले कॉल सेंटर भीतरी धोखाधड़ी के स्रोत हैं। इसकी वजह की पहचान करते हुए अध्ययन में कहा गया है कि आर्थिक मंदी कम्प्यूटर साक्षर अपराधियों को इलेक्ट्रानिक घोटालों की ओर ले जा रही है।
‘क्राइम आनलाइन: साइबर क्राइम एंड इल्लीगल इनोवेशन’ शीषर्क से प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि भारत, चीन, रूस और ब्राजील में साइबर अपराध ‘विशेष चिंता’ की बात है और हाल के वर्षों में भारत में ‘साइबर अपराध में तेजी आयी है’ जो बड़ी संख्या में काल सेंटरों के कारण है।
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर हावर्ड रश ने कहा, ‘भारत में समूहों और व्यक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा की तैयारियों के साथ रूस, चीन और ब्राजील साइबर अपराध में दुनिया में सबसे आगे हैं। फिर भी यूरोप और अमेरिका में कंपनियाँ अच्छे आईटी कौशल और कम मजदूरी की वजह से भारत, ब्राजील, रूस और पूर्वी यूरोप में सूचना प्रौद्योगिकी एवं साफ्टवेयर विकास का काम बढ़ा रही हैं।’ जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थओं की तुलना में भारत में साइबर अपराध हालाँकि कम हैं।
इसमें कहा गया, ‘हाल के वर्षों में साइबर अपराध में तेज बढोतरी हुई है।’ इसमें दावा किया गया है कि स्पैम, हैकिंग और धोखाधड़ी के सूचित मामलों की संख्या 2004 से 2007 में 50 गुना बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हाल की एक रिपोर्ट में भारत को 2008 में फिशिंग वेबसाइट शुरू करने के मामले में 14 वाँ देश आंका गया था। इसके अतिरिक्त भारत में फल फूल रहे कॉल सेंटर डाटा हासिल करने की साइबर आपराधिक गतिविधि के लिए उपयुक्त माहौल बना रहे हैं।’
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर अपराध वैश्विक उद्योग है लेकिन खराब आर्थिक अवसरों और बेहतर कौशल का गठजोड़ कई विकासशील क्षेत्रों को साइबर अपराध के प्रमुख खिलाड़ियों के तौर पर आगे ले जे रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में संगठित और अवसरवादी अपराधियों के लिए साइबर अपराध उच्च पुरस्कार और कम जोखिम वाला बना रहेगा। इसमें कहा गया कि नए खिलाड़ी भारत और ब्राजील जैसे देशों में उभर रहे हैं तथा जैसे जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क ज्यादा वैश्विक पहुँच हासिल करेंगे, ऐसे अवसर तेजी से बढ़ेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्या की व्यापकता को देखते हुए साइबर अपराध के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया कमजोर रही है। भविष्य के साइबर अपराधों से मुकाबले के लिए तैयारियों के कोई संकेत नहीं हैं। इसमें कहा गया है, ‘समुचित और प्रभावशाली तरीके से सामूहिक तौर पर प्रतिक्रिया देने में देश समस्याओं का सामना करते हैं।
समस्या की व्यापकता और प्रकृति स्वाभाविक तौर पर बहुदेशीय है. ब्रिटेन में चोरी किये गये क्रेडिट कार्ड के विवरण की प्रासेसिंग मलेशिया में हो सकती है और उसका उपयोग आस्ट्रेलिया में किया जा सकता है जबकि भारतीय काल सेंटर हर जगह भीतरी धोखाधड़ी के स्रोत हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों के आनलाइन होने के साथ ही साइबर अपराध नए और ज्यादा अनुमति योग्य माहौल पा रहा है विशेष तौर पर विकासशील देशों में जहाँ साइबर अपराध पैर जमा रहा है।
कानून प्रवर्तन एजेंसिया जवाब देने में संघर्ष कर रही है विशेष तौर पर उन जगहों पर जहाँ विधायी ढाँचा कमजोर या अनुपस्थित है। इसमें कहा गया है कि रूस, भारत और ब्राजील में साइबर अपराध की बढ़ोतरी विशेष चिंता की बात है।
WD
WD‘क्राइम आनलाइन: साइबर क्राइम एंड इल्लीगल इनोवेशन’ शीषर्क से प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि भारत, चीन, रूस और ब्राजील में साइबर अपराध ‘विशेष चिंता’ की बात है और हाल के वर्षों में भारत में ‘साइबर अपराध में तेजी आयी है’ जो बड़ी संख्या में काल सेंटरों के कारण है।
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर हावर्ड रश ने कहा, ‘भारत में समूहों और व्यक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा की तैयारियों के साथ रूस, चीन और ब्राजील साइबर अपराध में दुनिया में सबसे आगे हैं। फिर भी यूरोप और अमेरिका में कंपनियाँ अच्छे आईटी कौशल और कम मजदूरी की वजह से भारत, ब्राजील, रूस और पूर्वी यूरोप में सूचना प्रौद्योगिकी एवं साफ्टवेयर विकास का काम बढ़ा रही हैं।’ जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थओं की तुलना में भारत में साइबर अपराध हालाँकि कम हैं।
इसमें कहा गया, ‘हाल के वर्षों में साइबर अपराध में तेज बढोतरी हुई है।’ इसमें दावा किया गया है कि स्पैम, हैकिंग और धोखाधड़ी के सूचित मामलों की संख्या 2004 से 2007 में 50 गुना बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हाल की एक रिपोर्ट में भारत को 2008 में फिशिंग वेबसाइट शुरू करने के मामले में 14 वाँ देश आंका गया था। इसके अतिरिक्त भारत में फल फूल रहे कॉल सेंटर डाटा हासिल करने की साइबर आपराधिक गतिविधि के लिए उपयुक्त माहौल बना रहे हैं।’
WD
WDरिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में संगठित और अवसरवादी अपराधियों के लिए साइबर अपराध उच्च पुरस्कार और कम जोखिम वाला बना रहेगा। इसमें कहा गया कि नए खिलाड़ी भारत और ब्राजील जैसे देशों में उभर रहे हैं तथा जैसे जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क ज्यादा वैश्विक पहुँच हासिल करेंगे, ऐसे अवसर तेजी से बढ़ेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्या की व्यापकता को देखते हुए साइबर अपराध के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया कमजोर रही है। भविष्य के साइबर अपराधों से मुकाबले के लिए तैयारियों के कोई संकेत नहीं हैं। इसमें कहा गया है, ‘समुचित और प्रभावशाली तरीके से सामूहिक तौर पर प्रतिक्रिया देने में देश समस्याओं का सामना करते हैं।
समस्या की व्यापकता और प्रकृति स्वाभाविक तौर पर बहुदेशीय है. ब्रिटेन में चोरी किये गये क्रेडिट कार्ड के विवरण की प्रासेसिंग मलेशिया में हो सकती है और उसका उपयोग आस्ट्रेलिया में किया जा सकता है जबकि भारतीय काल सेंटर हर जगह भीतरी धोखाधड़ी के स्रोत हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों के आनलाइन होने के साथ ही साइबर अपराध नए और ज्यादा अनुमति योग्य माहौल पा रहा है विशेष तौर पर विकासशील देशों में जहाँ साइबर अपराध पैर जमा रहा है।
कानून प्रवर्तन एजेंसिया जवाब देने में संघर्ष कर रही है विशेष तौर पर उन जगहों पर जहाँ विधायी ढाँचा कमजोर या अनुपस्थित है। इसमें कहा गया है कि रूस, भारत और ब्राजील में साइबर अपराध की बढ़ोतरी विशेष चिंता की बात है।
