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इन 10 बातों से जानिए यौमे आशुरा की अहमियत। Youm-e-Ashura
* यौमे आशुरा यानी मोहर्रम माह की 10 (दस) तारीख।
* इस दिन खुदा की बड़ी-बड़ी नेमतों की निशानियां जाहिर हुईं और कर्बला की त्रासदी, 'हजरते इमाम हुसैन की शहादत' का भी यही दिन है।
* इसलिए पूरे इस्लामी विश्व में इस दिन रोजे रखे जाते हैं, क्योंकि पैगंबर मोहम्मद ने भी इस दिन कर्बला की घटना से पहले भी रोजे रखे थे।
* तैमूरी रिवायत को मानने वाले मुसलमान रोजा-नमाज के साथ इस दिन ताजियों-अखाड़ों को दफन या ठंडा कर शोक मनाते हैं।
* यौमे आशुरा को सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज के खुत्बे में इस दिन की फजीलत और हजरते इमाम हुसैन की शहादत पर विशेष तकरीरें होती हैं।
* इस दिन ज्यादातर मुसलमान अपना कारोबार बंद रखते हैं।
* मस्जिदों में नफिल नमाजें अदा कर रोजा रखकर शाम को इफ्तार किया जाता है।
* घरों में किस्म-किस्म के खाने बनाए जाते हैं।
* एक हजार मर्तबा कुल हुवल्लाह पढ़कर मुल्क और मिल्लत की सलामती की दुआएं की जाती हैं।
* इस दिन को पूरे विश्व में बहुत अहमियत, अज्मत और फजीलत वाला दिन माना जाता है।
इस दिन को 'यौमे आशुरा' कहा जाता है।
