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आर्थिक संकट से परेशान श्रीलंका में नए पीएम पर बवाल, 2 धड़ों में बंटा विपक्ष

Updated: गुरुवार, 12 मई 2022 (17:07 IST)
कोलंबो। श्रीलंका के समागी जन बलवेगया (SJB) के नेता सजित प्रेमदासा के संकटग्रस्त राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री बनने के इच्छुक नहीं होने के कारण मुख्य विपक्षी दल एसजेबी देश का अगला प्रधानमंत्री चुनने को लेकर 2 धड़ों में बंट गया है।
 
राष्ट्रपति ने बुधवार देर रात देश के नाम संबोधन में इस्तीफा देने से इनकार कर दिया, लेकिन इस सप्ताह एक नए प्रधानमंत्री और नए मंत्रिमंडल की नियुक्ति करने का वादा किया, जो संवैधानिक सुधार पेश करेगा।
 
उन्होंने देश के सबसे खराब आर्थिक संकट को लेकर प्रदर्शनों के बीच यह घोषणा की। इन प्रदर्शनों के कारण उनके बड़े भाई महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और वह अपने सहयोगियों पर हिंसक हमलों के बाद से एक नौसैन्य अड्डे पर सुरक्षा घेरे में हैं।
 
एसजेबी में विभाजन ऐसे समय में सामने आया है, जब उसके प्रमुख नेता हरिन फर्नांडो ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पार्टी से स्वतंत्र रहने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेता प्रेमदासा अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं।
 
फर्नोंडो ने कहा कि यह समय शर्तें लगाने और जिम्मेदारी से बचने का नहीं है, बिना सरकार के हरेक गुजरता मिनट विनाशकारी होगा। वह देश चलाने के लिए किसी भी अंतरिम प्रधानमंत्री का समर्थन करेंगे।
 
श्रीलंका में सोमवार से कोई सरकार नहीं है। गोटबाया के बड़े भाई और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने उनके समर्थकों द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किए जाने को लेकर भड़की हिंसा के बाद इस्तीफा दे दिया था। इस हमले से राजपक्षे के वफादारों के खिलाफ व्यापक पैमाने पर हिंसा भड़की, जिसमें दो पुलिस अधिकारी समेत नौ लोगों की मौत हो गई।
 
एसजेबी नेता फर्नांडो ने कहा कि प्रेमदासा ने यह नैतिक आधार अपनाया है कि वह भ्रष्ट राजपक्षे के तहत प्रधानमंत्री बनना स्वीकार नहीं करेंगे। अगर राष्ट्रपति इस्तीफा देते हैं तभी प्रेमदासा प्रधानमंत्री बनेंगे।
 
राष्ट्रपति ने बुधवार रात को संबोधन में कहा कि संसदीय बहुमत वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाएगा। ऐसी अटकलें है कि पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को अंतरिम सरकार का नया प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। उन्होंने बुधवार शाम को राष्ट्रपति से मुलाकात की थी।
 
श्रीलंका पीपुल्स पार्टी (एसएलपीपी) नेता महिंदा 2005 से 2015 तक देश के राष्ट्रपति थे और उस दौरान उन्होंने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ क्रूर सैन्य अभियान चलाया था।
 
इस बीच, राष्ट्रपति कार्यालय ने घोषणा की कि हिंसक घटनाओं के बाद लगाया गया देशव्यापी कर्फ्यू गुरुवार सुबह सात बजे से सात घंटों के लिए हटाया गया और उसे फिर से दोपहर दो बजे लागू किया जाएगा। कर्फ्यू शुक्रवार को सुबह छह बजे तक लागू रहेगा।

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