सम्बंधित जानकारी
- पाकिस्तान में हथियारबंद लोगों ने खदानकर्मियों पर किया हमला, 20 खनिकों की मौत
- उज्जैन में पूर्व पार्षद की गोली मारकर हत्या, प्रॉपर्टी विवाद में गई जान
- कपिल देव ने रतन टाटा की विनम्रता को याद किया
- भारत सबसे अधिक शुल्क लगाने वाला देश, ट्रंप ने किया जवाबी कार्रवाई का वादा
- जया या रेखा नहीं, यह लड़की थी अमिताभ बच्चन का पहला प्यार
पीएम मोदी बोले, समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता
PM Modi in laos : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के विभिन्न भागों में जारी संघर्षों का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने यूरेशिया और पश्चिम एशिया में शांति एवं स्थिरता की बहाली का आह्वान करते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। उनकी यह टिप्पणी यूरेशिया में यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष तथा पश्चिम एशिया में इजराइल-हमास युद्ध के बीच आई है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी, समृद्ध और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत पूरे क्षेत्र में शांति तथा प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। दक्षिण चीन सागर में शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हित में है।
मोदी ने कहा कि हमारा मानना है कि समुद्री गतिविधियां संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत संचालित की जानी चाहिए। नौवहन और वायु क्षेत्र की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है। एक मजबूत और प्रभावी आचार संहिता बनाई जानी चाहिए। और इससे क्षेत्रीय देशों की विदेश नीति पर कोई अंकुश नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण विकासवाद का होना चाहिए, न कि विस्तारवाद का।Years of Act East Policy.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) October 11, 2024
PM @narendramodi participated in the 19th East Asia Summit in Vientiane, Lao PDR, today.
PM stressed on ASEANs central role in s Act East Policy, the Indo-Pacific regional architecture, in s Indo-Pacific Vision and in Quad cooperation.… pic.twitter.com/yz9Sltue5e
प्रधानंमत्री ने कहा कि चाहे वह यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया, हर कोई चाहता है कि यथाशीघ्र शांति और स्थिरता बहाल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं बुद्ध की धरती से आता हूं और मैंने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है। समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना आवश्यक है। मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देनी होगी। विश्वबंधु की जिम्मेदारी निभाते हुए भारत इस दिशा में हरसंभव योगदान देता रहेगा।
मोदी ने कहा कि आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। इसका सामना करने के लिए मानवता में विश्वास रखने वाली ताकतों को मिलकर काम करना होगा।
Edited by : Nrapendra Gupta
