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Last Updated : गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026 (18:16 IST)

US Iran Tensions : मिडिल ईस्ट में US ने तैनात किए F-35, F-22 फाइटर जेट्स और warships, ईरान पर हमले की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप

इराक युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य घेराबंदी

Iran US War
मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध की आहट तेज हो गई है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में लड़ाकू विमानों और सहायक विमानों का एक विशाल बेड़ा तैनात कर दिया है। 'एक्सियोस' (Axios) की रिपोर्ट के अनुसार  अमेरिकी अधिकारियों और सलाहकारों ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई किसी भी समय शुरू हो सकती है।  यह पिछली बार की तरह 'एक बार हमला कर रुक जाने' वाली नीति से बिलकुल अलग होगा।

2003 के इराक युद्ध के बाद सबसे बड़ी सैन्य तैनाती

वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की यह हवाई ताकत 2003 के इराक आक्रमण के बाद इस क्षेत्र में सबसे बड़ी तैनाती है। पिछले कुछ दिनों में फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि अमेरिका ने अत्याधुनिक F-35 और F-22 स्टील्थ फाइटर जेट्स को लगातार ईरान की सीमाओं के करीब पहुंचाया है।  एक्सटपर्ट्‍स का मानना है कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो यह कोई 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसा सीमित हमला नहीं होगा, बल्कि हफ्तों तक चलने वाला एक पूर्ण विकसित युद्ध हो सकता है।

आखिर क्या चाहता है अमेरिका 

तनाव की शुरुआत ईरान में बढ़ती महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से हुई, जिसने बाद में सरकार विरोधी रूप ले लिया। आयतुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी। अब मुख्य फोकस ईरान के परमाणु भंडार पर है, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर रोकना चाहता है।

क्या तख्तापलट की रणनीति  

मीडिया खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप को सैन्य विकल्पों पर कई ब्रीफिंग दी गई हैं। इन विकल्पों का उद्देश्य ईरानी शासन और उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी को अधिकतम नुकसान पहुंचाना है। उनके पास मुख्य रूप से दो बड़े ऑप्शन है- ईरानी राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाकर शासन को उखाड़ फेंकने का अभियान। केवल परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं तक सीमित हवाई हमले। ये दोनों ही विकल्प हफ्तों तक चलने वाले सैन्य ऑपरेशनों का हिस्सा हो सकते हैं। 
 

डिप्लोमेसी या युद्ध? सस्पेंस बरकरार

एक तरफ जहां युद्ध की तैयारी दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक रास्ते भी खुले हैं। इसी हफ्ते जिनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों ने यूरेनियम संवर्धन को लेकर संभावित समझौते पर चर्चा की।  व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि बातचीत में 'थोड़ी प्रगति' हुई है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक-दूसरे से 'काफी दूर' हैं। फिलहाल ट्रंप ने अंतिम हमले का आदेश नहीं दिया है, लेकिन तैनात की गई मारक क्षमता यह बताती है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। Edited by : Sudhir Sharma