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Last Modified: वॉशिंगटन , मंगलवार, 6 जनवरी 2026 (16:23 IST)

ऑपरेशन सिंदूर से डरे पाकिस्तान ने अमेरिका को कैसे साधा? अमेरिकी दस्तावेजों से खुला राज

operation sindoor
Operation Sindoor : ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी दस्तावेजों से हुए खुलासे से पाकिस्तान का असली चेहरा फिर दुनिया के सामने आ गया है। इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि जम्मू कश्मीर में पहलगाम हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले तक और 4 दिन के भारत-पाक तनाव के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
 
अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के रिकॉर्ड से पता चला है कि ऑपरेशन सिंदूर की मार झेल रहा पाकिस्तान, भारतीय कार्रवाई को रोकने के लिए अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहा था। अमेरिका में नियुक्त पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने 60 से ज्यादा बैठकों के लिए ईमेल, फोन कॉल और मीटिंग की थीं। इनका मकसद अमेरिका पर भारत के खिलाफ दबाव बनाना था। 
 
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी सांसदों के अलावा पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय), राज्य विभागों समेत कई बड़े पत्रकारों से संपर्क करने की कोशिश की थी। इन बैठकों में कश्मीर मुद्दे से लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पर द्विपक्षीय संबंधों और रेयर अर्थ मिनरल्स पर बात हुई थी।
 
अमेरिका को अपने पक्ष में करने के लिए पाकिस्तान ने करोड़ों का दांव लगाया था। नवंबर 2025 में छपी न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने वाशिंगटन की लॉबिंग फर्म को लगभग 5 मिलियन डॉलर (45 करोड़ रुपये) दिया था, जिसका फायदा ट्रंप प्रशासन को भी हुआ था।
 
रिपोर्ट के अनसार, पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स के माध्यम से काम कर रही सेडेन लॉ एलएलपी के साथ डील की थी। इसके कुछ हफ्तों बाद ही ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का स्वागत किया था। ट्रंप को खुश करने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार देने की अपील की। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने ट्रंप को बिजनेस और व्यापार से जुड़े ढेरों लालच दिए थे।
 
क्या था पाकिस्तान का मकसद : पाकिस्तान चाहता था कि अमेरिका भारत की सैन्य कार्रवाई को रोके। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव बहुत बढ़ गया था। नतीजतन लॉबिंग से अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों में तेज बदलाव आया। पाकिस्तान ने इस दौरान ट्रंप की जमकर तारीफ की, यहां तक कि नोबेल पुरस्कार के लिए भी उनके नाम की सिफारिश की। 
edited by : Nrapendra Gupta 
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