1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. अंतरराष्ट्रीय
  4. internet cable digital blackout world war 3 risk
Last Modified: शुक्रवार, 20 मार्च 2026 (23:41 IST)

तेल सकंट के बाद Digital Blackout का खतरा, हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरान के समुद्री माइन्स बिछाने से क्यों खौफ में दुनिया, जानिए क्या होगा असर

Hormuz Strait crisis
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की सप्लाई को सामान्य होने में 6 महीने या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इस बीच ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन्स बिछाने की खबरों ने दुनिया को और चिंता में डाल दिया है। अब खतरा सिर्फ तेल सप्लाई रुकने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी बड़ा संकट मंडराने लगा है। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि अगर हालात और बिगड़े तो यह संघर्ष पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी लड़ा जा सकता है।
 

किस बात को लेकर दुनियाभर में खौफ 

हॉर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ता सैन्य तनाव दुनिया के लिए तेल संकट के साथ-साथ डिजिटल संकट का संकेत भी माना जा रहा है।  हालांकि ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर इंटरनेट केबल को निशाना बनाने की बात नहीं कही गई है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने आशंका बढ़ा दी है कि अगर संघर्ष लंबा चला तो वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क भी इसकी चपेट में आ सकता है।
 
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि इसी संकरे समुद्री रास्ते के नीचे से 20 से ज्यादा महत्वपूर्ण अंडरसी इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं, जिनके जरिए एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व के बीच डेटा ट्रांसफर होता है।

भारत के इंटरनेट ट्रैफिक पर क्या असर 

इन केबल्स में Tata-TGN Gulf सहित कई ऐसी लाइनें शामिल हैं, जिन पर भारत का इंटरनेट ट्रैफिक और अंतरराष्ट्रीय डेटा कनेक्टिविटी काफी हद तक निर्भर करती है। अगर युद्ध के दौरान बिछाई गई माइन्स, मिसाइल हमले या समुद्री टकराव से इनमें से कोई केबल क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो उसका असर सीधे इंटरनेट स्पीड, बैंकिंग सिस्टम, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय संचार पर पड़ सकता है।

आसान नहीं होगा ठीक करना  

सबसे बड़ा खतरा यह बताया जा रहा है कि अगर केबल को नुकसान हुआ तो उसे ठीक करना आसान नहीं होगा। आमतौर पर अंडरसी केबल की मरम्मत के लिए विशेष रिपेयर जहाज भेजे जाते हैं, लेकिन अगर पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र में बदल गया, तो कोई भी जहाज वहां जाने का जोखिम नहीं उठाएगा। ऐसी स्थिति में कई देशों में इंटरनेट की स्पीड लंबे समय तक धीमी रह सकती है और कुछ सेवाएं पूरी तरह ठप भी हो सकती हैं।
टेक्निकल एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि आधुनिक दौर में युद्ध सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र में नहीं लड़े जाते, बल्कि साइबर और डिजिटल ढांचे को निशाना बनाकर भी विरोधी देश को कमजोर किया जाता है।  एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो यह पहली बार होगा जब किसी बड़े युद्ध का असर सीधे दुनिया के डिजिटल ढांचे पर पड़ेगा और तब यह सवाल और गंभीर हो जाएगा कि क्या तीसरा विश्व युद्ध हथियारों से ज्यादा इंटरनेट और डेटा पर लड़ा जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma
ये भी पढ़ें
21 मार्च की टॉप खबरें: डिएगो गार्सिया पर ईरान का मिसाइल अटैक, ट्रंप युद्ध पर कन्फ्यूज, भारत में ईद का जश्न