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भारत करेगा ईरान के चाबहार में भारी निवेश

Updated: सोमवार, 23 मई 2016 (16:06 IST)
तेहरान। भारत ईरान के चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने (एल्युमीनियम स्मेल्टर से लेकर यूरिया संयंत्र तक) के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेगा जिसके लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ।

 
सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने यहां कहा कि चाबहार के रणनीतिक बंदरगाह के निर्माण और परिचालन संबंधी वाणिज्यिक अनुबंध पर समझौते से भारत को ईरान में अपने पैर जमाने और पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान, रूस और यूरोप तक सीधी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
 
उन्होंने कहा कि कांडला एवं चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी नई दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम है इसलिए इस समझौते से हमें पहले वस्तुएं ईरान तक तेजी से पहुंचाने और फिर नए रेल एवं सड़क मार्ग के जरिए अफगानिस्तान ले जाने में मदद मिलेगी।
 
उन्होंने कहा कि चाहबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां 2 दिन की यात्रा पर आए और इस दौरान वे भारत-ईरान संबंध को मजबूत करने और ईरान के खिलाफ प्रतिबंध हटाए जाने का बड़े पैमाने पर फायदा उठाकर व्यापार बढ़ाने के तरीके तलाशेंगे।
 
गडकरी ने कहा कि ईरान के पास सस्ती प्राकृतिक गैस और बिजली है और भारतीय कंपनियां 50 लाख टन का एल्युमीनियम स्मेल्टर संयंत्र और यूरिया विनिर्माण इकाइयां स्थापित करना चाहती हैं तथा हम यूरिया सब्सिडी पर 45,000 करोड़ रपए सालाना खर्च करते हैं और यदि हम इसका विनिर्माण चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में करते हैं और कांडला बंदरगाह ले जाते और वहां से भीतरी इलाकों में तो उतनी ही राशि की बचत होगी।
 
गडकरी ने कहा कि नाल्को एल्युमीनियम स्मेल्टर स्थापित करेगी जबकि निजी एवं सहकारी उर्वरक कंपनियां यूरिया संयंत्र बनाने की इच्छुक हैं बशर्ते उन्हें 2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से कम की दर पर गैस मिले। उन्होंने कहा कि रेलवे का पीएसयू इरकॉन चाबहार में एक रेल लाइन का निर्माण करेगा ताकि अफगानिस्तान तक सीधे सामान पहुंचाया जा सके।
 
गडकरी ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और कांडला पोर्ट ट्रस्ट की संयुक्त उद्यम इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड यहां 640 मीटर लंबी 2 कंटेनर गोदी और 3 बहु मालवाहक गोदी के निर्माण पर 8.5 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। भारतीय कंसोर्टियम ने आरिया बनादेर इरानियन के साथ बंदरगाह समझौता किया।
 
उन्होंने कहा कि यह अनुबंध 10 साल के लिए है और इसका विस्तार किया जा सकता है। हमें पहले चरण का निर्माण पूरा करने में 18 महीने का समय लगेगा। अनुबंध के पहले 2 साल की अवधि छूट अवधि है जिसमें भारत को किसी कार्गो के लिए गारंटी नहीं देनी है। (भाषा)
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