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क्‍या सच में एलियंस हमारी धरती पर कचरा फेंक रहे हैं?

Updated: मंगलवार, 5 जनवरी 2021 (17:36 IST)
धरती पर एलियंस की मौजूदगी को लेकर हमेशा से कोई न कोई अटकलें और अंदाजे लगाए जाते रहे हैं। कुछ लोग इन बातों से सरोकार रखते हैं तो कोई इसे कोरी अफवाह ही मानता है। दुनिया के कई हिस्‍सों में एलियंस की मौजूदगी को लेकर प्रमाण भी मिले हैं। हालांकि आज तक किसी ने भी एलियंस को देखने का दावा नहीं किया है।
लेकिन हाल ही में एलियंस को लेकर हार्वर्ड के प्रोफेसर ने एक नया और अनोखा दावा किया है। उनका कहना है कि एलियंस हमारी धरती पर कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोनॉमी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अवी लोएब का कहना है कि धरती की तरफ आने वाले चमकते पत्थर, एस्टेरॉयड या उल्कापिंड अपने आप नहीं आ रहे हैं, बल्कि एलियंस की ओर से धरती पर फेंके जा रहे हैं। इसे अंतरिक्ष का कचरा यानी स्पेस गार्बेज कहा जाता है।

प्रोफेसर ने अपनी किताब एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियलः द फर्स्ट साइन ऑफ इंटेलिजेंट लाइफ बि‍यॉन्ड अर्थ में बताया कि साल 2017 में एलियंस ने अंतरिक्ष का कचरा धरती पर फेंका था। इसे यहां शोध कर रहे वैज्ञानिक चमकीला पत्थर समझ रहे थे। लेकिन हकीकत यह है कि यह एलियंस की ओर से भेजा या फेंका गया था। इसने हमारे सौर मंडल की यात्रा भी की है।

प्रोफेसर ने बताया कि अंतरिक्ष से आई इस वस्तु का नाम ओउमुआमुआ है। यह 300 फीट लंबी पत्थर जैसी दिखने वाली वस्तु है। यह काफी नुकीला और अलग किस्म का था। यह पहला ऐसा स्पेस टूरिस्ट था दूसरी दुनिया से आकर हमारे सौरमंडल में चक्कर लगाकर वापस चला गया हो। रिसर्च में पता चला कि इस पत्थर पर सूरज की गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी काम नहीं कर पाई। यह अपनी चौड़ाई से दस गुना ज्यादा लंबा था और दूसरे उल्कापिंडों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा था। यह हमारे सौर मंडल में दिखने वाले एस्टेरॉयड्स या उल्कापिंडों से दस गुना ज्यादा रोशनी परावर्तित कर रहा था।

उन्होंने यह भी कहा है कि धरती की तरफ आने वाले चमकदार पत्थर इस बात को साबित करते हैं कि धरती के अलावा भी जीवन है। उनका दावा है कि एलियंस जो पत्थर या उल्कापिंड फेंक रहे हैं उससे पूरा अंतरिक्ष भर रहा है। उन्होंने ये भी कहा है कि अंतरिक्ष में एलियंस की मौजूदगी के कई प्रमाण हैं। वे हमारी धरती पर नजर रखते हैं। उनके विमान जैसी वस्तुएं आकर धरती का चक्कर काटकर निकल जाती हैं।

बता दें कि इससे पहले भी प्रोफेसर अवी लोएब इस तरह के दावे कर चुके हैं। साल 2017 में उन्होंने इस बात का जिक्र अपनी किताब Extraterrestrial: The First Sign of Intelligent Life Beyond Earth में किया था।
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें

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