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International Plastic Bag Free Day: इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे कब और क्यों मनाया जाता है?

Image caption: A photo conveying the message of International Plastic Bag Free Day and providing information on tackling the serious issue of plastic pollution
antarrashtriya plastic bag mukt divas kab manaya jata hai: प्रत्येक वर्ष 3 जुलाई को दुनिया भर में 'इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे' यानी अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बहुत सीधा और साफ है, सिंगल-यूज़ (एक बार इस्तेमाल होने वाले) प्लास्टिक बैग के हानिकारक प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उन्हें कपड़े या जूट के थैलों जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
  • यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें...
  • पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना
  • समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा
  • मानव स्वास्थ्य की रक्षा
  • ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना
  • हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?
 
 

आइए जानते हैं कि इस खास दिन की शुरुआत कब हुई और इसे मनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी:

 

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसे 'ज़ीरो वेस्ट यूरोप' (Zero Waste Europe) के एक सदस्य 'रीज़ेरो' (Rezero) द्वारा शुरू किया गया था। शुरुआत में यह अभियान सिर्फ यूरोप के कुछ देशों तक सीमित था। लेकिन धीरे-धीरे, जैसे-जैसे दुनिया को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ, यह एक वैश्विक (Global) आंदोलन बन गया। अब हर साल 3 जुलाई को दुनिया के दर्जनों देश मिलकर इस मुहिम का हिस्सा बनते हैं।
 

यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें...

प्लास्टिक बैग हमारे लिए कुछ मिनटों की सुविधा तो लाते हैं, लेकिन यह हमारी धरती के लिए सैकड़ों सालों का सिरदर्द बन जाते हैं। इस दिन को मनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
 

1. पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना

प्लास्टिक बैग 'नॉन-बायोडिग्रेडेबल' (Non-biodegradable) होते हैं, यानी ये प्राकृतिक रूप से कभी नष्ट नहीं होते। एक साधारण प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से टूटने या गलने में 100 से 500 साल का समय लग सकता है। तब तक यह मिट्टी और पानी में मिलकर जहरीले सूक्ष्म कणों (Microplastics) में बदल जाता है, जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।
 

2. समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा

हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंचता है। समुद्री जीव- जैसे कछुए, मछलियां और व्हेल्स अक्सर प्लास्टिक बैग को खाना समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में ब्लॉक हो जाता है और दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है। ठीक इसी तरह, शहरों में लावारिस घूमने वाले पशु- जैसे गाय कचरे के ढेर से प्लास्टिक बैग खा लेते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।
 

3. मानव स्वास्थ्य की रक्षा

जब प्लास्टिक बैग मिट्टी में दबे रहते हैं, तो इनसे निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स जमीन के अंदर के पानी (Groundwater) में मिल जाते हैं। जब पशु या मछलियां इसे अनजाने में खाते हैं, तो यह फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंच जाता है, जिससे कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
 

4. ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना

शहरी इलाकों में प्लास्टिक बैग्स का सबसे बड़ा साइड-इफेक्ट यह दिखता है कि ये नालियों और सीवर पाइपों में फंस जाते हैं। बारिश के मौसम में इसकी वजह से सड़कों पर पानी भर जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
 

हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

बदलाव हमेशा घर से शुरू होता है। इस दिन को सार्थक बनाने के लिए हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये छोटे बदलाव कर सकते हैं:
 
'नो' कहना सीखें: जब भी आप सब्जी या राशन लेने जाएं, तो दुकानदार से प्लास्टिक बैग लेने से साफ मना करें।
 
विकल्प अपनाएं: हमेशा अपनी गाड़ी में या जेब में एक कपड़े या जूट का थैला साथ रखें।
 
जागरूकता फैलाएं: अपने परिवार और दोस्तों को भी प्लास्टिक के नुकसान बताएं और उन्हें भी थैला इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।
 
एक कड़वा सच: एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर मिनट लगभग 20 लाख प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनका औसत उपयोग समय सिर्फ 12 मिनट होता है। इस 12 मिनट की सुविधा के लिए हम अपनी धरती को सदियों का नुकसान पहुंचा रहे हैं।
 
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लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
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