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गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने के खास नियम हैं जानिए मंत्र भी

Updated: बुधवार, 18 मई 2022 (17:14 IST)
बुधवार और चतुर्थी तिथि गणेशजी के दिन है। इस दिन इनकी विशेष पूजा करना चाहिए। पूजा करने के दौरान गणेशजी को विशेष वस्तुएं अर्पित की जाती है जो कि उनके पसंद की होती है। इन वस्तुओं को अर्पित करने से गणपतिजी प्रसन्न हो जाते हैं। इन्हीं वस्तुओं से एक है दूर्वा। आओ जानते हैं दूर्वाचढ़ाने के खास नियम और मंत्र।

दूर्वा चढ़ाने के खास नियम :
1. प्रात:काल उठकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। 
 
2. फिर ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र बोलते हुए जितनी पूजा सामग्री उपलब्ध हो उनसे भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। 
 
3. गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर लगाएं। फिर उन्हें 21 गुड़ की ढेली के साथ 21 दूर्वा चढ़ाएं। मतलब 21 बार 21 दूर्वा की गाठें अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा गणेशजी को मोदक और मोदीचूर के 21 लड्डू भी अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और फिर प्रसाद बांट दें।
 
4. दूर्वा अर्पित करने का मंत्र : 'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।' : इस मंत्र के साथ श्रीगणेशजी को दूर्वा चढ़ाने से जीवन की सभी विघ्न समाप्त हो जाते हैं और श्रीगणेशजी प्रसन्न होकर सुख एवं समृद्धि प्रदान करते हैं।
 
5. क्या होगा दूर्वा अर्पित करने से : इस दिन गणेशजी को दूर्वा चढ़ाकर विशेष पूजा की जाती है। ऐसा करने से परिवार में समृद्धि बढ़ती है और मनोकामना भी पूरी होती है। इस व्रत का जिक्र स्कंद, शिव और गणेश पुराण में किया गया है।
ॐ गणाधिपाय नमः
ॐ उमापुत्राय नमः
ॐ विघ्ननाशनाय नमः
ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
ॐ एकदन्ताय नमः
ॐ इभवक्त्राय नमः
ॐ मूषकवाहनाय नमः
ॐ कुमारगुरवे नमः

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