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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 17 जनवरी 2026 (12:39 IST)

बिजनौर: हनुमान मूर्ति के चारों ओर 4 दिन से घूम रहा कुत्ता, आस्था या कोई संकेत? Video

Hanumaan ji ki murti ki parikaram  karta hua kutta
Dog News: बिजनौर के नंदपुर गांव की यह घटना वास्तव में हैरान करने वाली और श्रद्धा से भरी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने लोगों को हैरत में डाल दिया है। जहाँ ग्रामीण इसे हनुमान जी की भक्ति और चमत्कार मान रहे हैं, वहीं इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों और जीव विज्ञानियों के नजरिए से इस व्यवहार के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।
 
कुत्ता कर रहा है हनुमान मूर्ति की परिक्राम: एक कुत्ता चार दिनों से बिजनौर के गांव नंदपुर में हनुमान प्रतिमा की लगातार चार दिनों से बिना रुके परिक्रमा कर रहा है। तीसरे दिन कुत्ते ने कुछ देर आराम करने के बाद दूध पिया और फिर दोबारा परिक्रमा शुरू कर दी। 
 

कुत्ते का 'सर्कलिंग' (Circling) व्यवहार

पशु चिकित्सा विज्ञान:
पशु चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यदि कोई जानवर लगातार एक ही घेरे में घूम रहा है, तो इसे 'सर्कलिंग' कहा जाता है। इसके कुछ चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं:
न्यूरोलॉजिकल समस्या: कुत्ते के मस्तिष्क में किसी संक्रमण, सूजन या चोट के कारण वह एक ही दिशा में घूमने लगता है।
वेस्टिबुलर सिंड्रोम:
कान के अंदरूनी हिस्से में समस्या होने पर संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे जानवर गोल-गोल घूमने को मजबूर हो जाता है।
सावधानी की सलाह: विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कुत्ता बीमार है, तो लगातार घूमने से वह थककर गिर सकता है या उसे डिहाइड्रेशन हो सकता है। श्रद्धा अपनी जगह है, लेकिन मानवीय आधार पर उस बेजुबान को पानी और डॉक्टर की जांच उपलब्ध कराना भी पुण्य का काम होगा।
 

कुत्ते का फोबिया या चिंता (Anxiety)

कंपल्सिव डिसऑर्डर: कई बार कुत्ते किसी खास आवाज, गंध या जगह से डरकर 'कंपल्सिव डिसऑर्डर' (OCD) का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में वे एक ही क्रिया को बार-बार दोहराते हैं ताकि उन्हें मानसिक शांति मिल सके। कुत्तों में फ्रंट ब्रेन डिसऑर्डर यानी अग्र मस्तिष्क विकार मस्तिष्क के अगले हिस्से को प्रभावित करता है। इसमें भ्रम, दौरे या चोट जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं, जिससे व्यवहार और संतुलन में बदलाव आता है। ऐसे मामलों में कुत्ता दिशाहीन हो सकता है, गोल-गोल घूम सकता है या उसके व्यवहार में बदलाव दिख सकता है।
 
गंध का प्रभाव (Scent Marking)
हो सकता है कि हनुमान जी की मूर्ति के आसपास किसी ऐसी चीज की गंध (जैसे तेल, सिंदूर या प्रसाद) हो, जो कुत्ते को आकर्षित कर रही हो या जिसे वह अपना इलाका मानकर उसके चारों ओर घूम रहा हो।
 

कुत्ता परिक्रमा मामला: आस्था का नजरिया:

हिंदू आस्था: भले ही विज्ञान इसके पीछे बीमारी या व्यवहारिक कारण बताए, लेकिन ग्रामीणों के लिए यह परम आस्था का विषय है। हिंदू धर्म में पशुओं को भी चेतना युक्त माना गया है (जैसे नंदी, गरुड़ या हनुमान जी स्वयं)।
 
पूर्वजन्म का संस्कार: ग्रामीण इसे पूर्व जन्म का संस्कार मान रहे हैं। यही कारण है कि वहां भंडारे और पूजा-पाठ का आयोजन शुरू हो गया है। सूचना मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कुत्ते के लिए दूध व रोटी रखी, लेकिन उसने कुछ नहीं खाया। श्रद्धालु उसके लिए दूध-रोटी लेकर कतारों में खड़े हैं और जयकारे लगा रहे हैं