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महाराणा प्रताप पर कविता :वह भारत का था अभिमान

रविवार,मई 9, 2021
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मां, तुम्हारी स्मृति, प्रसंगवश नहीं अस्तित्व है मेरा। धरा से आकाश तक
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मां, मां रोते हुए बच्चों का खुशनुमा पलना है, मां, मां मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है।
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कैसे चलते होंगे वे गैरों की अंगुलियां थामकर, जिंदगी जिनकी दूसरों की रहनुमा होती है। खुद गीले में सो, हमें सूखे में सुलाने वाली, वह मां तो खुद ईश्वर का रूप होती है।
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Poem on Mothers Day : ममता की मूरत

बुधवार,मई 5, 2021
मां आपकी उंगली पकड़कर ही तो मैंने चलना सीखा, आपकी ममता के आंचल में मैंने एक गीत लिखा।
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रोक दो, टोक दो हर उस इंसान को घूम रहा गलियों में, जो बिना लगाए मास्क को झिझक का बंधन तोड़ दो
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लोग हैं हारे टूटे ,कोविड सितम, कमर तोड़ गया है, ढा रहा है कहर औ ज़िन्दगियों को झिंझोड़ गया है! हैरां है हर आदमी,ग़मगीन चेहरे पे मुर्दनी पसरी हुई, जाने कौन ये ठीकरा,सबके सर पर फोड़ गया है! बिछड़े जो इंसान अपनों से,मिल न पाएंगे वे कभी, मजबूरियां इतनी, ...
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रमंति इति रामः! हे अजेय ! हो दुर्जेय ! मम जीवन मंत्र तुम्हीं रोम-रोम में रमण तुम्हीं गति का नाम तुम्हीं सतत प्रवाहित एक नाम तुम्हीं ! हे शिव आराधक
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हे राम !! तुम्हे आना होगा ..जग पर बरसी यह विकट आपदा तुमको ही तो मिटाना होगा .....
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हुई पूर्ण प्रतीक्षा जन-जन की 'लाल' का स्वप्न साकार अवध में प्रकट भए श्री राम निभाने रघुवर-रघुकुल रीत
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राम तुम्हें अब आना होगा, मैं शबरी बन जाऊंगी, ध्यान तुम्हारा नित मैं धरूंगी रघुपति राघव गाऊंगी
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तुम जो मेरे हुए !! मिली हर ख़ुशी चूड़ियों की खन-खन पायल की छन-छन दास्तां नई सुनाने लगी तुम जो मेरे हुए.... रातें हुईं मदभरी ख़ूबसूरत सबेरे हुए साँसे मेरी महकी बदन खुशबुओं के डेरे हुए
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अप्रैल फूल कहीं नहीं खिलता मगर खिल जाता एक अप्रैल को क्या, क्यों, कैसे ? अफवाओं की खाद से और
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बहुत जुगत लिया लगाय, पर सूझे न कोई उपाय, तीव्रमती पड़ोसन को कैसे बनाया मूरख जाय, सहसा बुद्धि में द्रुत गति से
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हर एक ग़म को हर्फ़ में ढाला था किसे कहां पता भीतर हाला था लब की शोख हंसी चेहरे का नूर ख़ुद को तपा कर उसने ढाला था
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होली का रंगबिरंगा पर्व आ गया है लेकिन कोरोना की कालिमा ने सारे रंगों को जैसे ग्रहण लगा दिया है। कोरोना के साये में मनाई जाने वाली होली की शुभकामनाएं भी बदली बदली हैं आइए ... इस बार इन शुभकामना संदेशों से करें होली की शुरुआत...
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होली का त्योहार मस्ती और ठिठोली का होता है लेकिन इस बार होली पर हमें सुरक्षा के नियमों का पालन करना है और एहतियात से त्योहार की खुशियां मनानी है... इस बार अपनों को संदेश भेजें लेकिन कोरोना की सुरक्षा चेतावनी के साथ.. वेबदुनिया की टीम आपके लिए लाई है ...
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रंगों का सजीला पर्व होली करीब है.. लेकिन कोरोना के कारण उदास गुलाल और अबीर है.... कोरोना किसी का सगा नहीं, सामने कौन है गरीब या अमीर है.... समझना और समझाना हमें ही है, शुभकामनाओं के जरिए संदेश यह फैलाना है, अपने साथ अपनों को भी बचाना है....
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सौरभ फैला विपुल धूप बन, मृदुल मोम-सा घुल रे मृदु तन; दे प्रकाश का सिन्धु अपरिमित, तेरे जीवन का अणु गल-गल!
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जीते जी क्रांति करने वाले भगत सिंह के लिखे हुए शेर उनके बाद भी क्रांति पैदा करने की ताकत रखते हैं। देश के प्रति उनका प्रेम, दीवानगी और मर मिटने का भाव, उनकी शेर और कविताओं में साफ नजर आता है, एक बार पढ़ेंगे तो खून में देशभक्‍ति महसूस होने लगेगी।
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