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हिन्दी कविता : मेरी बेटी, आंगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली

मंगलवार,फ़रवरी 23, 2021
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बूंदे सोचें बादल में, कहां मैं बरसूं आज, कटे झाड़ हैं, गले हाड़ हैं, आवे मोहे लाज।
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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की 2 कविताएं-
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पुण्य संगम, पारितोषी। मां आशुतोषी, मां आशुतोषी। दशार्णा, शांकरी, मुरन्दला।इन्दुभवा, तेजोराशि, चित्रोत्पला। दुर्गम पथ गामनी, हे नर्मदे,
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सरस्वती के नाम से, कलुष भाव हो अंत। शब्द सृजन होवे सरस, रसना हो रसवंत।। वीणापाणि मां मुझको, दे दो यह वरदान।
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विश्व बहुत उदास है, चेतना जग की जगा मां, वीणा की झंकार दे! सुविकसित विज्ञान
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मातु शारदा आप हैं, विद्या बुद्धि विवेक, मां चरणों की धूलि से, मिलती सिद्धि अनेक। झंकृत वीणा आपकी, बरसे विद्या ज्ञान,
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पेट की कविता में, कांधे पर बीवी का शव, रखे दाना मांझी है। अस्पताल में, मौत से लड़ता, आम आदमी है।
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क्यों शहीद हुए? तुम्हारे ही देश में-जहां देखा था तुमने रामराज्य का स्वप्न,
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वह अटल खड़ा है उत्तर में, शिखरों पर उसके, हिम किरीट। साक्षी, विनाश निर्माणों का, उसने सब देखी, हार-जीत।
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फुरसत नहीं है अब, करना देश निर्माण है। हर पल देश विकास में, देना मुझे प्रमाण है।
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जिस दिन से घर में आती हैं बेटियां, माता-पिता की इज्जत बन जाती हैं बेटियां।
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बेटी युग में खुशी-खुशी है, पर मेहनत के साथ बसी है। शुद्ध कर्म-निष्ठा का संगम, सबके मन में दिव्य हंसी है।
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गणतंत्र दिवस 2021- अपना वतन जान से प्‍यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा, गंगा यमुना सरस्वती जैसी
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गणतंत्र दिवस का मौका पूरे देश के लिए गर्व और गौरव का विषय है। इस अवसर पर पूरे देश में पूरी गरिमा के साथ आयोजन किए जाते हैं। आइए इस अवसर पर आपके लिए प्रस्तुत हैं खासतौर से गणतंत्र दिवस को ध्‍यान में रखकर लिखी गई खास कविता-
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हा, तुम्हारी मृदुल इच्छा! हाय, मेरी कटु अनिच्छा! था बहुत मांगा ना तुमने किन्तु वह भी दे ना पाया! था तुम्हें मैंने रुलाया!
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हरिवंश राय बच्चन की कविता- आ रही रवि की सवारी। नव-किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों-से अनुचरों ने स्‍वर्ण की पोशाक धारी।
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हिन्दी काव्य प्रेमियों में हरिवंश राय बच्‍चन सबसे अधिक प्रिय कवि रहे हैं और सर्वप्रथम 1935 में प्रकाशित उनकी 'मधुशाला' आज भी लोकप्रियता के सर्वोच्च शिखर पर है। यहां पढ़ें हरिवंश राय बच्‍चन की सबसे लोकप्रिय कविता-
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अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छांह भी मांग मत,
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चाहती हूं कि इन रंगों को रख दो मेरी हथेलियों पर कि जब मैं निकलूं तपती हुई पीली दोपहर में अकेली तो इन्हें छिड़क सकूं...दुनिया की कालिमा पर मुझे इसी कैनवास पर तुम्हारे दिए रंग सजाना है प्यार कितना खूबसूरत होता है सबको बताना है...
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