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poem | हरसिंगार इस बार भी....

हरसिंगार
अनन्त मिश्र
ND
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हरसिंगार इस बार भी
सितंबर के अंत में
ढेरों खिले
कुछ जमीन पर झरे
और कुछ चुने गए
कुछ ओढ़ लिए गए
रोज सुबह
घंटे भर के अंदर
अपनी महक
सुंदरता और रंग
लुटाने वाले हरसिंगार के पुष्पों का
शीतकालीन मौसमी जीवन
हर वर्ष दुहराया जाएगा
और हर वर्ष शायद तुम्हारी देह की दुनिया में
उसी को पाया जाएगा....!