सरगम होती है कविता
विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र'
ND
शीर्षक के शब्दों को देती, अर्थ सदा पूरी कविता।
सजल नयन और तरल हृदय,परपीड़ा से होता है ना
हम सब में ही छुपा कवि है,बता रही हमको कविता।
छंद बद्ध हो या स्वच्छंद हो, अभिव्यक्ति का साधन है
मन के भावों का शब्दों में, सीधा चित्रण है कविता।
कोई दृश्य, जिसे देखकर भी न देख सब पाते हैं
कवि मन को उद्वेलित करता, तब पैदा होती कविता।
कवि की उस पीड़ा का मंथन, शब्द-चित्र बन जाता है
दृश्य वही देखा-अनदेखा, हमको दिखलाती है कविता।
लेख, कहानी, व्यंग्य विधाएँ, लिखने के हथियार बहुत
कम शब्दों में गाते-गाते, बात बड़ी कहती कविता।
बच्चों सी मासूमियत ही, कवियों की जागीर है
बम-धमाकों,आतंक के माहौल में,शांति का संदेश कविता।
