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Written By WD

शरद की दमकती रात में

शरद
फाल्गुनी
ND
शरद की दमकती रात में,
प्रश्नाकुल मन,
बहुत उदास,
कहता है मुझसे,
उठो, चाँद से बातें करो
और मैं,
बहने लगती हूँ
श्वेत सौम्य चाँदनी में, तब,
तुम बहुत याद आते हो।

मैं शरद के चाँद में

ढूँढती हूँ तुम्हारा चेहरा

और मेरे चेहरे पर खिल उठती है

वही शरदीया मुस्कान और

चाँद मुझसे रात भर बातें करता है।
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WD