Republic Day of India | भारत माँ के लिए
रेखा भाटिया
ND
जो मैंने तेरी गोद मैं बैठकर बिताए,
आभारी हूँ उन लम्हों का जब तेरे आँगन में
गुरु के चरणों में बैठ मैंने शिक्षा पाई,
कैसे भुलाऊँ वो ठंडी-ठंडी स्याह रातें
जब तेरे साये में बैठ चम-चम चंदा से
मैंने की हजार बातें,
कौन-से गीत गाऊँ जब तेरी बगिया के
सुन्दर फूलों की नर्म पंखुड़ियों को
छुआ था मैंने,
कैसे भुलूँ उस अहसास को
जब तेरे आँचल से बरसती
वर्षा की नर्म बूंदों ने मेरा मन भिगोया था,
कैसे थामूँ उस वक्त को
जब तेरी माटी से लिपटकर
मेरे व्यक्तित्व ने साकार रूप धरा था,
कैसे लौटाऊँ उन क्षणों को
जब विपदा के हर क्षण में
तूने मेरा साथ कभी न छोड़ा था,
मैं ही दूर जा चुका हूँ माँ,
न अब वो नर्म गोद है ,
न ही तेरी खुशबू ,
न ही ममता भरा वो नाजुक स्पर्श है ,
न ही तेरे आँचल का साया है,
बस एक कसक-सी है,
ND
कभी फिर लौट आऊँगा तेरे पास,
वो ही खुला आकाश,
नर्म-नर्म बिछौना,
बस फिर सिर्फ तू और मैं,
सितारों से भरे आँसमाँ में दमकता चंदा,
कई वर्षों से मैं सोया नहीं हूँ माँ,
आकर एक गहरी नींद लूँगा,
तेरे लहराते आँचल के साए में।
