बारिश के गाँव में
दीपाली पाटील
जब समंदर किनारों की हवाएँ चुराने लगे लहरों से नमी तब ग्रीष्म का कैलेंडर बदल हम बारिश के गाँव जाएँगेप्रतीक्षा की धुल बह जाएगी समय के पत्तों से जब मिलन की सौंधी खुशबू आएगीतब गीली मिट्टी पर दूर तलक हम कदमों के निशान बनाएँगेशिकवे-शिकायतों की झड़ी देर तक बरस कर थम जाएगीखुशियों के फूलों से जब पूरी वादी महक जाएगीतब फिर तुम ठहर मत जानाऔर थोड़ी दूर तक चलना साथतुम्हे दिखाना है बारिश के बाद धुले हुए पत्तों परबूँदों के मोती कैसे चमक उठते हैजैसे कोई सपना लिए चमक उठती है आँखें तुम्हारीएक दरिया भी दिखाना है जो चट्टानों से डर नहीं जातातुम्हारे विश्वास की तरह सिर्फ बहता जाता हैहम वक्त के इस दरिया को पार कर अपनी मंजिल तक जाएँगेऔर पाएँगे कि बहुत खूबसूरत था बारिश का ये गाँवक्योंकि भीगे-से उसकेहर मोड़ पर था सिर्फ तुम्हारा साथ।