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love poem | प्यार से कोई मनाए तो सही

साहित्य
मुरलीधर चाँदनीवाल
NDND
खिल उठेगा दिल, पर लगेंगे आरजू को,
हवा का झोंका कहीं से आए तो सही।

पलक पावड़े बिछाए बैठा हूँ मैं कब से,
मीत कोई द्वार पर आए तो सही।

गाने न लगूँ मल्हार, ऐसा हो नहीं सकता,
बदरी कहीं आकाश में छाए तो सही।

झूम लूँ, थोड़ा नाच लूँ, गुनगुना लूँ,
मन को ऐसी बात कुछ भाए तो सही।

शरमा कर, सकुचा कर मान ही जाऊँगा,
कोई आए, प्यार से मनाए तो सही।

गम में कोई डूबा है तो क्या, डूबा ही रहे,
खुशी देकर उसे कोई हँसाए तो सही।

हल निकलेगा, अभी नहीं, कल सही,
दिल खोलकर जरा बताए तो सही।