चाँदनी आए तो बता देना
ग़ज़ल
परवीन कुमार अश्क कोठरी में दिया जला देनाबाकी सब बत्तियाँ बुझा देनासज्दा करना सभी बुजुर्गों कोसारे बच्चों को तू दुआ देनारात के साथ जा रहा हूँ मैंचाँदनी आए तो बता देनाकभी अहसान न लेना बादल काआँसुओं की झड़ी लगा देनाबाग के सूखने से पहले हीखुशबुओं को कहीं छुपा देनापहले उँगली पकड़ना रहबर कीफिर उसे रास्ता दिखा देनाशाम ललकाराना चराग का 'अश्क'सुबह सूरज का मुस्करा देना।