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Written By स्मृति आदित्य

गुलाबी प्यार की खुशबू

फाल्गुनी

फाल्गुनी
ND
मेरे मन की कोमल तितली
तुम्हारे दिल के नीले फूल पर
मँडराती रही
और
तुम्हारे गुलाबी प्यार की खुशबू
मेरी पीली हथेलियों पर पसीजती रही,
फिर भी ना तुम मुझसे खिल सके
ना मैं तुमसे महक सकी।
ना तुम भावनाओं के धरातल पर
अपने रिश्तों की बुनावट रच सके
ना सुहाने मौसम की छाँव तले
तुम तक आने से मेरे पाँव बच सके।
मेरे अकेलेपन की कुवाँरी साँझ
तुम्हारे ख्याल भर से
सुहागन होती रही और
तुम अपने हाथ का कोरा सिंदूर
ढलते क्षितिज को देते रहे।
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य