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कल फिर एक उजाला होगा

उजाला
विलास पंडित 'मुसाफिर'
NDND
सचमुच हिम्मतवाला होगा
जिसने दर्द को पाला होगा

पैदा हुई सियासत जिस दिन
वो दिन कितना काला होगा

आज अंधेरा है गर प्यारे
कल फिर एक उजाला होगा

दरिया पर दरिया पीता है
सागर तो मतवाला होगा

यार मुसाफिर नाम है उसका
उसके घर पर ताला होगा।