- लाइफ स्टाइल
» - साहित्य
» - काव्य-संसार
कबाड़ घर में जीवन
लोकेन्द्रसिंह कोट घर की बेकार समझीजाने वाली जगह है 'कबाड़ घर' तमाम पुरानी औरबेकार वस्तुओं का घर।घर क्या, घर का हाशिया।परदादा की अँगरेजों केजमाने में खींची गईमटमैली फोटो से लेकरदादी के पसंदीदा मर्तबान,डेगची, लोहे की कढ़ाही,दादा की आरामकुर्सी,सिगार दान, संघर्ष के दिनोंके साथी दुपहिया के कलपुर्जे...
और भी बहुत कुछ। वर्षों से उधर कोई जाता नहीं हैदीपावली का दीपक रखने भी नहीं। लेकिन 'कबाड़ घर' के उजालदानोंसे घुसकर चार चिड़ियों के जोड़ोंने बना रखे हैं घोंसले और'
कबाड़ घर' कोघर में बदल रखा है।भुलाए जाने के बाद भीतमाम पुरानी औरबेकार वस्तुएँपाल-पोस रही हैंकई और जीवन...।