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आठ गया अब नौ आता है
सतपाल ख्याल जश्न है हर सू , साल नया हैहम भी देखें क्या बदला है। गै़र के घर की रौनक है वोअब वो मेरा क्या लगता है। दुनिया पीछे दिलबर आगेमन दुविधा में सोच रहा है तख्ती पे 'क' 'ख' लिखता वो-बचपन पीछे छूट गया है। नाती-पोतों ने जिद की तोअम्मा का संदूक खुला है। याद 'ख्याल' आई फिर उसकीआँख से फिर आँसू टपका है। दहशत के लम्हात समेटेआठ गया अब नौ आता है।