होली की कविता : फागुन में बिखेरे टेसू ने रंग

Tesu Flower n Holi
पहाड़ों पर टेसू ने रंग बिखेरे फागुन में
हर कदम पर बज रहे ढोल फागुन में
ढोल की थाप पे थिरकते पैर फागुन में
महुआ लगे झूमने गीत सुनाए फागुन में

बिन पानी खिल जाते टेसू फागुन में
पानी संग मिल रंग लाते टेसू फागुन में

रंगों के खेल हो जाते शुरू फागुन में
दुश्मनी छोड़ दोस्ती के मेल होते फागुन में

शरमा जाते हैं सब मौसम फागुन में
मांग ले जाते प्रेमी कुछ प्यार फागुन में

हर चेहरे पर आ जाती खुशहाली फागुन में
भगोरिया के नृत्य लुभा जाते फागुन में
बांसुरी, घुंघरू के संग गीत सुनती फागुन में
ताड़ों के पेड़ों से बन जाते रिश्ते फागुन में

शक्कर के हार-कंगन बन जाते मेहमां फागुन में
पहाड़ों की सचाई हमसे होती रूबरू फागुन में।



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