देवेंद्र सोनी बेटी कल भी थीं, आज भी हो, आगे भी रहोगी तुम पिता का नाज। बीता बचपन, आई जवानी छूटा वह घर, जिस पर था तुम्हारा ही राज। कल भी था, आज भी है आगे भी रहेगा तुम्हारा ही यह घर। पर अब, हो गया है एक...