History of Shivaji Maharaj: छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती साल में दो बार मनाई जाती है- एक अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 19 फरवरी को, और दूसरी हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार। आज महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में परंपरागत रूप से 'शिव जयंती' के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। वे मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे और उनके शासनकाल में मराठा साम्राज्य ने अपार विजय प्राप्त की। तिथिनुसार आज शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही है।
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तिथि का महत्व
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गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध) के जनक
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भारतीय नौसेना के पितामह
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अष्टप्रधान मंडल (प्रशासनिक कुशलता)
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महिलाओं का सम्मान और धर्मनिरपेक्षता
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हिंदवी स्वराज्य की स्थापना
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प्रेरक प्रसंग: अफजल खान का वध
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शिवाजी महाराज– FAQs
तिथि का महत्व
शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी को तथा तिथि के अनुसार आज हुआ था। कई भक्त और संगठन तिथि के अनुसार ही उत्सव मनाना पसंद करते हैं क्योंकि यह भारतीय काल गणना की परंपरा से जुड़ा है। छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान योद्धा और कुशल शासक भी थे। वे केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक युगप्रवर्तक थे। उनके बारे में ये बातें उन्हें दुनिया के महानतम नायकों की श्रेणी में खड़ा करती हैं:
1. गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध) के जनक
शिवाजी महाराज जानते थे कि उनकी सेना मुगलों और बीजापुर की विशाल सेनाओं के मुकाबले छोटी है। इसलिए उन्होंने 'गुरिल्ला युद्ध' की तकनीक अपनाई। वे पहाड़ियों और जंगलों का उपयोग करके अचानक हमला करते और दुश्मन को संभलने का मौका दिए बिना सुरक्षित स्थान पर लौट जाते थे।
2. भारतीय नौसेना के पितामह
वे भारत के पहले ऐसे मध्यकालीन शासक थे जिन्होंने समुद्र की रक्षा के महत्व को समझा। उन्होंने कोंकण तट की रक्षा के लिए एक शक्तिशाली नौसेना तैयार की और विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग जैसे समुद्री किलों का निर्माण करवाया ताकि डच, पुर्तगाली और अंग्रेजों के समुद्री आक्रमणों को रोका जा सके।
3. अष्टप्रधान मंडल (प्रशासनिक कुशलता)
4. महिलाओं का सम्मान और धर्मनिरपेक्षता
शिवाजी महाराज के शासन में महिलाओं का अपमान करना सबसे बड़ा अपराध माना जाता था। युद्ध में जीते गए प्रदेशों की महिलाओं को वे माता के समान सम्मान देकर ससम्मान वापस भेजते थे। उनके प्रशासन में कई मुस्लिम अधिकारी भी उच्च पदों पर थे, जो उनके न्यायप्रिय स्वभाव को दर्शाता है।
5. हिंदवी स्वराज्य की स्थापना
उस दौर में जब विदेशी आक्रांताओं का बोलबाला था, शिवाजी महाराज ने "स्वराज्य" का नारा दिया। उनका उद्देश्य किसी विशेष धर्म पर अत्याचार करना नहीं, बल्कि भारत की भूमि पर भारतीयों का शासन स्थापित करना था।
प्रेरक प्रसंग: अफजल खान का वध
शिवाजी महाराज की वीरता का सबसे बड़ा उदाहरण प्रतापगढ़ की तलहटी में मिलता है, जहां उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से विशालकाय अफजल खान का वध किया था। अफ़जल खान ने उन्हें धोखे से मारने की कोशिश की थी, लेकिन शिवाजी ने पहले ही 'बाघ नख' पहन रखे थे, जिससे उन्होंने खान का पेट चीर दिया।
शिवाजी महाराज धर्मनिरपेक्ष थे। वे सभी धर्मों का सम्मान करते थे और उनके शासन में सभी धर्मों को समान अधिकार प्राप्त थे। शिवाजी महाराज का जीवन प्रेरणा से भरपूर है। उनकी बहादुरी, नेतृत्व क्षमता, और उनके द्वारा किए गए समाज सुधार आज भी हमें प्रेरित करते हैं।
शिवाजी महाराज– FAQs
Q1. शिवाजी महाराज ने कितने किलों पर अधिकार किया था?
A. उन्होंने अपने जीवनकाल में लगभग 300 से अधिक किलों पर नियंत्रण स्थापित किया था।
Q2. शिवाजी महाराज का प्रशासन कैसा था?
A. उनका प्रशासन सुशासन, धार्मिक सहिष्णुता और जनकल्याण पर आधारित था। उन्होंने 'अष्टप्रधान मंडल' की स्थापना की थी, जिसमें आठ प्रमुख मंत्री शामिल थे।
Q3. शिवाजी महाराज को 'छत्रपति' की उपाधि कब मिली?
A. 1674 में राज्याभिषेक के समय उन्हें 'छत्रपति' की उपाधि प्रदान की गई।
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